देहरादून RIMC के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ, भाई-बहन की जोड़ी का हुआ एडमिशन

आंध्र प्रदेश के सुजान इस वक्त 10वीं में हैं। अब उनकी बहन तेल्लूरी एग्नेस भी आरआईएमसी का हिस्सा बन गई हैं, उनका चयन नए सत्र के लिए हुआ है।
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dehradun rimc admission process: Sibling Admission in Dehradun RIMC
Image: Sibling Admission in Dehradun RIMC

देहरादून: भारतीय राष्ट्रीय मिलिट्री कॉलेज, जिसे सेना का गुरुकुल भी कहा जाता है। यहां नए सत्र से एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई

Sibling Admission in Dehradun RIMC

आरआईएमसी में पहली बार भाई-बहन की जोड़ी की एंट्री हुई है। भाई दो साल पहले से आरआईएमसी में पढ़ रहा था, अब बहन ने भी एंट्रेंस एग्जॉम पास कर आरआईएमसी में दाखिल पा लिया है। दोनों आंध्रप्रदेश के नंदयाल के रहने वाले हैं। यहां दो साल पहले सुजान नाम के छात्र ने एडमिशन लिया था, सुजान इस वक्त 10वीं में हैं। अब उनकी बहन तेल्लूरी एग्नेस भी आरआईएमसी का हिस्सा बन गई हैं, उनका चयन नए सत्र के लिए हुआ है। सौ साल के इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा है कि भाई-बहन यहां एक साथ पढ़ाई कर सकेंगे।

गौरवशाली इतिहास वाले आरआईएमसी में 100 साल तक सिर्फ लड़कों को ही एंट्री मिलती रही, लेकिन बीते साल आरआईएमसी के स्थापना दिवस के मौके पर कॉलेज के दरवाजे लड़कियों के लिए भी खोल दिए गए। यहां लड़कियों के लिए 5 सीटें आरक्षित की गई हैं। पिछले साल जुलाई में यहां सिर्फ एक ही लड़की एंट्री पाकर अपनी पढ़ाई शुरू कर सकी थी। ऐसे में यहां पिछले सत्र से लड़कियों की 4 सीटें खाली चल रही थी। जनवरी से शुरू हो रहे नए बैच में 4 सीटों को और जोड़ते हुए देशभर से 9 लड़कियों को आरआईएमसी में प्रवेश दिया गया है। जनसंपर्क अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि 9 में से 6 लड़कियों ने पढ़ाई शुरू कर दी है। जबकि अन्य लड़कियों के दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया भी पूरी हो गई है।

Dehradun RIMC History

बता दें कि आरआईएमसी की स्थापना तत्कालीन प्रिंस ऑफ वेल्स ने 13 मार्च 1922 को देहरादून में की थी। तब इसका नाम रॉयल इंडियन मिलिट्री कॉलेज रखा गया। बाद में किंग एडवर्ड ने आरआईएमसी नाम से इसका उद्घाटन किया। शुरू में आरआईएमसी में देश के युवाओं को प्रशिक्षित कर ब्रिटिश भारतीय सेना में अधिकारी बनाया जाता था। आजादी के बाद से छात्रों को यहां सेना के तीनों अंगों के लिए शिक्षित किया जा रहा है। आरआईएमसी में हर साल पूरे देश से सिर्फ 30 छात्रों को एंट्री मिलती है, जिसमें 5 सीटें छात्राओं के लिए हैं। बड़ी आबादी वाले राज्यों को छोड़कर हर राज्य का सिर्फ एक ही छात्र यहां एंट्री हासिल कर पाता है। साढ़े 11 से 13 साल की आयु वर्ग के छात्र-छात्राओं को यहां आठवीं में एंट्री मिलती है और 12वीं तक पढ़ाई होती है। प्रवेश के लिए राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली प्रवेश परीक्षा पास करनी होती है