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रुद्रपुर: उत्तराखंड में जहां एक ओर भाजपा लगातार रणनीति बनाते हुए आगामी चुनावों की तैयारी कर रही है तो वहीं कांग्रेस के बीच में चल रहा द्वंद दिन तक दिन और अधिक प्रबल होता है नजर आ रहा है।
कांग्रेस के रुद्रपुर-किच्छा समेत तराई की राजनीति में कांग्रेस के संघर्षशील चेहरों में तिलकराज बेहड़ का नाम प्रमुख हैं। मगर किच्छा विधायक के बयानों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है और कांग्रेस पार्टी के बीच में हलचल पैदा कर दी है। यह किस्सा जुड़ा है गुटबाजी से जो कि कांग्रेस के बीच में बेहद आम है। आपको यह बता दें कि इसे गुटबाजी के कारण ही कांग्रेस को पिछले विधानसभा चुनावों में बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था। खैर एक तरह से देखा जाए तो गुटबाजी पर सवाल खड़ा करना बनता किया क्योंकि इसी की वजह से कांग्रेस लोगों के बीच में विश्वास कायम नहीं कर पा रही है और इसी गुटबाजी पर तीखे तेवर दिखाते हुए बेहद ने कांग्रेस को टारगेट किया है। अब बेहड़ ने प्रदेश संगठन पर सवाल खड़े किए हैं। कहा कि गढ़वाल में कांग्रेस की अच्छी सीट आई थी। इसलिए अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष में से एक पद वहां जाना चाहिए। अब भी मौका है। आगे पढ़िए
बेहड़ ने कहा कि अगर अगला चुनाव जीतना है तो प्रदेश के नेता दिल्ली जाकर अपनी चूक स्वीकारें। उन्होंने कहा कि गढ़वाल में ज्यादा विधायक होने के साथ कई वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं। इसलिए एक अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष में से एक पद वहां भी जाना चाहिए था। यही नहीं अब प्रीतम सिंह भी बेहड़ के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा है कि तिलक राज बेहड़ एक अनुभवी नेता है, वरिष्ठ नेता हैं। उन्होंने जो कहा है उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब देखना यह होगा कि प्रदेश कांग्रेस किस तरह इस डैमेज को कंट्रोल करती है और तिलकराज बेहड़ की इस बात पर विचार विमर्श कर नेता प्रतिपक्ष या प्रदेश अध्यक्ष में बदलाव कर गढ़वाल के किसी नेता को इन जिम्मेदारियों के लिए चुनती है या नहीं।