उत्तराखंड में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ शादी का ये कार्ड, जानिए आखिर क्यों बरपा है हंगामा

बीते दिनों शादी का कार्ड छपकर आया तो कुछ लोगों को ये चुभ गया। उन्होंने कार्ड की फोटो खींचकर इसे शेयर करना शुरू कर दिया। मीम्स भी खूब बन रहे हैं।
Advertisement Best Hidden Treks in Kedar Himalaya for True Mountain Lovers

A chance to reconnect with nature and inner peace. Treks in Kedar Himalaya that stay with you for a lifetime.

Example Ads Media
Monis monika wedding card uttarakhand: Uttarakhand Monis Weds Monica Wedding Card Viral
Image: Uttarakhand Monis Weds Monica Wedding Card Viral

पौड़ी गढ़वाल: शादी दो दिलों और दो परिवारों के बीच का एक बंधन है। अपनी मर्जी से जो जहां चाहे शादी कर सकता है, बशर्ते वो नाबालिग न हो।

Uttarakhand Monis Weds Monica Wedding Card

खैर इस बीच उत्तराखंड में सोशल मीडिया में इन दिनों एक बीजेपी नेता की बेटी की शादी का कार्ड तेजी से वायरल हो रहा है। जिन बीजेपी नेता की यहां बात हो रही है, वो पौड़ी के पूर्व विधायक रह चुके यशपाल बेनाम हैं। यशपाल बेनाम वर्तमान में पौड़ी के नगर पालिका अध्यक्ष हैं। अब ये सवाल आपके मन में भी उठ रहा होगा कि आखिर उनकी बेटी की शादी के कार्ड में ऐसा क्या है, जिसने इसे मशहूर बना दिया है। दरअसल इसकी वजह ये है कि यशपाल बेनाम की बेटी की शादी एक मुस्लिम युवक से तय हुई है। यही वजह है कि शादी का कार्ड सुर्खियों में है। सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं। आगे पढ़िए

बीजेपी नेता यशपाल बेनाम की बेटी मोनिका की शादी यूपी के रहने वाले मुस्लिम युवक मोनिस से तय हुई है। शादी के लिए दोनों परिवारों की सहमति है। बीते दिनों शादी का कार्ड छपकर आया तो कुछ लोगों को ये चुभ गया। उन्होंने कार्ड की फोटो खींचकर इसे शेयर करना शुरू कर दिया। मीम्स भी खूब बन रहे हैं। कई यूजर्स तो बीजेपी संगठनों को लव जेहाद पर लेक्चर न देने और अपने नेताओं को द केरल स्टोरी दिखाने की सलाह भी दे रहे हैं। तमाम संगठनों के लोगों ने भी इस शादी को लेकर प्रतिक्रिया दी है। मामले में राजनीति भी शुरू हो गई है। दरअसल शादी के कार्ड में दोनों पक्षों के नाम लिखे हुए हैं, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर बीजेपी की हिंदूवादी सोच को खूब निशाना बनाया जा रहा है। यहां आपको ये भी बता दें कि बालिग लड़के और लड़की को साथ रहने शादी / निकाह करने का हक भारत का संविधान देता है। धार्मिक उन्माद के चरम के बावजूद यशपाल बेनाम इस बात के लिए भी बधाई के पात्र है कि उन्होंने बाकायदा निमंत्रण पत्र छाप कर अपने बच्चों के इस फैसले को स्वीकारने की हिम्मत जुटाई।