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जहां आज भी सिर्फ चरवाहे जाते हैं – केदार हिमालय के अनदेखे ट्रेक्स
प्रकृति, शांति और हिमालय – केदार के गुप्त ट्रेक्स.. यहां कदम रखते ही बदल जाती है सांस और सोच – Hidden Kedar Trails
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बात करें बदरीनाथ हाईवे की तो यहां पर भी लगातार भूस्खलन हो रहा है। यहां शाम छह बजे भारी बारिश के दौरान अचानक पहाड़ी से टनों मलबा खिसक कर हाईवे पर आ गया। जिससे हाईवे के दोनों ओर से यात्रा वाहनों की लंबी लाइन लग गई। हाईवे के दोनों ओर से करीब 7000 तीर्थयात्री फंस गए हैं। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने बताया कि हाईवे खुलने पर तीर्थयात्रियों को गंतव्य की ओर भेज दिया जाएगा। कई तीर्थयात्रियों ने हाईवे के शीघ्र न खुलने से पीपलकोटी, चमोली, बिरही, नंदप्रयाग में रुकने का निर्णय लिया। आगे पढ़िए
कई तीर्थयात्री हाईवे खुलने का इंतजार करते रहे। वहीं, बदरीनाथ धाम से चार किलोमीटर पहले कंचन गंगा में भी सड़क व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की ओर से वाहनों की आवाजाही के लिए गदेरे में पत्थर और मिट्टी बिछाकर वाहनों की आवाजाही करवाई जा रही है। यहां हाईवे बेहद तंग हालत में पहुंच गया है। मंगलवार को कंचन गंगा के उफान पर आने से करीब 100 मीटर हिस्सा बह गया था। यहां गदेरे से ही वाहनों की आवाजाही करवाई जा रही है। कुल मिला कर उत्तराखंड में इन दिनों यात्रा करना खतरे से खाली नहीं है। ऐसे में मौसम विभाग ने लोगों से घर पर सुरक्षित रहने की अपील की है।