सबसे खास बात ये है कि एटलस मौथ कुछ खाती नहीं है, इसका मुंह नहीं होता। इसे एंपरर ऑफ डार्कनेस भी कहा जाता है।
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अनुष्का ढौंडियाल
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Image: Atlas moth found in Pithoragarh
पिथौरागढ़: पिथौरागढ़ जिले में मिली एटलस मौथ ने हर किसी के होश उड़ा दिए हैं। एटलस मौथ विश्व में पाई जाने वाली सबसे बड़ी मौथ में से एक है।
Atlas moth found in Pithoragarh
विंग्स फाउंडेशन के सदस्यों ने पिथौरागढ़ में एटलस मौथ को देखा है, जो कि जैव विविधता के लिहाज से अच्छा संकेत है। एटलस मौथ की उम्र 20 से 25 दिन तक होती है। इसके पंखों का फैलाव 24 सेमी तक होता है, जबकि पंखों की सतह 124 इंच होती है। सबसे खास बात ये है कि एटलस मौथ कुछ खाती नहीं है, इसका मुंह नहीं होता है। यह अपने अंडे नींबू, अमरूद और दालचीनी के पौधों पर देती है। इसके लार्वा अपने बचाव के लिए एक गंध स्प्रे करते हैं जो 12 इंच तक जाता है। एटलस के दोनों पंखों के किनारे पर कोबरा के सिर जैसी आकृति बनी होती है। इस आकृति के कारण परभक्षी इनसे दूर ही रहते हैं। इसे एंपरर ऑफ डार्कनेस भी कहा जाता है। बता दें कि जिले में वन विभाग के सहयोग से नेशनल मौथ सप्ताह मनाया जा रहा है।
विंग्स फाउंडेशन ने पहली बार नेशनल मौथ काउंट सीजन-एक शुरू किया है। मौथ सप्ताह 22 से 30 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान विंग्स फाउंडेशन के सदस्य पिथौरागढ़, मुनस्यारी, मूनाकोट, डीडीहाट, अस्कोट क्षेत्र में मौथ की खोजबीन कर उनकी जानकारी जुटाएंगे। मुनस्यारी में ब्रजेश धर्मशक्तू, चंदन कुमार, पिथौरागढ़ में राजू भंडारी, दीपक कल्पासी मौथ की खोज करेंगे। इसके अलावा अन्य लोग भी अभियान में सहयोग कर रहे हैं। विंग्स फाउंडेशन के निदेशक जगदीश भट्ट ने बताया कि पिथौरागढ़ में पहली बार नेशनल मौथ काउंट सीजन वन की शुरुआत की गई है। इसके तहत जिले में मिलने वाली मौथ के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। नेशनल मौथ सप्ताह के दौरान लोग अपने क्षेत्र में पाई जाने वाली मौथ की फोटो भी भेज सकते हैं। लोग 9756202345 पर फोटो वाट्सएप कर सकते हैं, या [email protected] पर मेल कर सकते हैं। विश्व में मौथ की 16 हजार प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से 10 हजार प्रजातियां भारत में हैं।