लिंगुड़ा को जो सम्मान हम नहीं दे पाए वो सम्मान विदेशों में मिल रहा है। पूरी दुनिया में ये सुपरफूड के रूप में मशहूर है और इसकी सप्लाई अमेरिका तक हो रही है।
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कोमल नेगी
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हजारों वर्षों से जलती अखंड ज्योति के सामने सात फेरे - आस्था, परंपरा और प्रकृति का अनोखा संगम
पहाड़, मंत्र और देवभूमि का आशीर्वाद.. त्रियुगीनारायण में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, आध्यात्मिक अनुभव है।
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Image: Know the benefit of Linguda Uttarakhand
चमोली: पहाड़ में रहते हैं तो कभी न कभी लिंगुड़ा की सब्जी जरूर खाई होगी। आज की जनरेशन पहाड़ में मिलने वाले परंपरागत खान-पान से दूरी बना चुकी है और इसी आहार को अब विदेशी अपनाने लगे हैं।
Know the benefit of Linguda Uttarakhand
लिंगुड़ा ऐसी ही सब्जी है, जिसे सुपर फूड कहा जाता है। स्वास्थ्य की देखभाल के नाम पर आज लोग ओमेगा-3 फैटी एसिड, आयरन, जिंक और कैल्शियम के लिए महंगे कैप्सूल ले रहे हैं और ये सभी तत्व लिंगुड़ा में प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं। लिंगुड़ा यानि फिडरहेड फर्न्स उत्तराखंड में मिलने वाली जंगली सब्जी है। जिसमें ओमेगा-3 होने के साथ ही कई खनिज प्राकृतिक रूप से मौजूद हैं। इसके सेवन से कैंसर नहीं होता, हृदय, यकृत, त्वचा और हड्डियों संबंधी बीमारी में भी इसके सेवन से लाभ मिलता है। बरसात में मिलने वाले लिंगुड़ या लिंगुड़ा को जो सम्मान हम नहीं दे पाए वो सम्मान विदेशों में मिल रहा है। पूरी दुनिया में ये सुपरफूड के रूप में मशहूर है और उत्तराखंड से इसे अमेरिका सहित अन्य देशों में सप्लाई किया जा रहा है।
शोध में पता चला है कि लिंगुड़ा ओमेगा-3 फैटी एसिड का एक उत्कृष्ट गैर-समुद्री वैकल्पिक आहार स्त्रोत है। इसके खिले हुए पत्तों में किसी भी खाने योग्य हरे पौधे से अधिक फैटी एसिड स्पेक्ट्रम मौजूद है। ओमेगा-3 फैटी एसिड पूरे मानव शरीर में कोशिका झिल्ली का एक अभिन्न अंग होता है और सूजन और कोलेस्ट्रोल को कम करने में मदद करता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड के लिए लोग महंगी दवाइयों का सेवन करते हैं, जबकि लिंगुड़ा में ये नेचुरल तौर पर मिलता है। उत्तराखंड और हिमाचल में लिंगुड़ा समुद्र तट से 1800 से 3000 मीटर की ऊंचाई पर नमी वाली जगह पर मार्च से जुलाई तक उगता है। इसका वैज्ञानिक नाम डिप्लाजियम एसकुलेंटम है। यह वनस्पतियों के एथाइरिएसी कुल से संबंधित है। दुनियाभर में लिंगुड़ा की 400 प्रजाति पाई जाती हैं।