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Untouched Trekking Routes in Kedar Himalaya, Uttarakhand
Lesser-known treks offering breathtaking Himalayan views. A perfect blend of adventure, solitude, and spirituality.
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देहरादून: इन दिनों उत्तराखंड में रामलीला महोत्सव की धूम मची है। उत्तराखंड के अलग-अलग क्षेत्रों में होने वाली रामलीला की अपनी खास विशेषता है।
कहीं रामलीला में महिला पात्र पुरुषों की जगह महिला कलाकारों द्वारा निभाए जा रहे हैं तो वहीं उत्तराखंड का एक क्षेत्र ऐसा भी है, जहां रामलीला के पात्र को निभाने वाले ज्यादातर कलाकार सरकारी विभाग के कर्मचारी हैं। रामलीला के माध्यम से इनके भीतर के कलाकार को बाहर आने का मौका मिला है। हम बात कर रहे हैं देहरादून के धर्मपुर क्षेत्र की, जहां पर्वतीय रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित रामलीला में सचिवालय, विधानसभा व अन्य सरकारी संस्थानों के कर्मचारी अपने अभिनय से लोगों का दिल जीत रहे हैं। भगवान राम की भूमिका नकुल बधानी निभा रहे हैं, जो कि विधानसभा में कार्यरत हैं। इसी तरह ताड़का बने शेर सिंह सचिवालय में राज्य संपत्ति विभाग में चालक हैं। इनकी आजकल सीएम की फ्लीट में ड्यूटी है।
ड्यूटी खत्म होने के बाद वो रामलीला में ताड़का का रोल करने पहुंचते हैं। उनके अभिनय की लोग जमकर तारीफ भी कर रहे हैं। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष जीवन सिंह बिष्ट ने बताया कि रामलीला मंचन में ज्यादातर अधिकारी कर्मचारी सचिवालय और विधानसभा कैडर के ही हैं। कुछ कलाकार अन्य सरकारी विभागों में कार्यरत हैं। कॉलेज के छात्रों को भी रामलीला में अभिनय करने का मौका मिला है। रामलीला में कैलाश पांडे दशरथ का रोल निभा रहे हैं, वो सचिवालय से अनुभाग अधिकारी पद से रिटायर हुए हैं। इसी तरह विश्वामित्र बने दीप बुड़लाकोटी आयुष विभाग में प्रशासनिक अधिकारी हैं। मंगलवार को इन कलाकारों ने धनुष खंडन और सीता स्वयंवर का मंचन किया। जिसे दर्शकों ने तालियां बजाकर सराहा। परशुराम-लक्ष्मण संवाद और राम बारात का मंचन भी बेहतरीन रहा। सरकारी विभागों में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों के टैलेंट को रामलीला के माध्यम से शानदार मंच मिला है। पात्रों के अभिनय की खूब तारीफ हो रही है।