Advertisement
भीड़ से दूर, स्वर्ग के सबसे पास – केदार हिमालय के Hidden Treks
बुग्याल, हिमालयी वन और बर्फीली चोटियों का अद्भुत नज़ारा। आध्यात्म, रोमांच और एकांत का अनोखा संगम।
Example Ads Media
देहरादून: इन दिनों उत्तराखंड के कई गांवों में बाघ-गुलदार की दहशत के चलते अघोषित कर्फ्यू लगा है। बच्चे स्कूल नहीं जा रहे, महिलाओं ने घास के लिए जंगल जाना छोड़ दिया है।
रामनगर में बाघ के हमले में दो महिलाएं मारी गईं, अब एक डराने वाली खबर त्यूणी से आई है, जहां चिल्हाड़ गांव में गुलदार की दहशत बनी हुई है। गुलदार के डर से लोग अपने पशुओं को जंगल में चराने नहीं ले जा रहे, न ही जंगल से चारापत्ती ला पा रहे हैं। ग्रामीणों ने किसी अनहोनी की आशंका के चलते वन विभाग अधिकारियों से मामले में जल्द सुरक्षात्मक कदम उठाने का आग्रह किया है। ग्रामीणों ने बताया कि चकराता वन प्रभाग से जुड़े बावर रेंज के दारागाड़-कंडोला में गुलदार की सक्रियता देखी गई है। आगे पढ़िए
चिल्हाड़ गांव मसूरी-चकराता-त्यूणी से जुड़े चिल्हाड़-बाणाधार मार्ग पर स्थित है। यहां पिछले कुछ दिनों में गुलदार को कई बार देखा जा चुका है। इससे चिल्हाड़ व बाणाधार पंचायत के लोग दहशत में हैं। आबादी क्षेत्र के नजदीक जिस जगह गुलदार को देखा गया, वहां पैदल रास्ते से कई बच्चे राइंका चिल्हाड़ व प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने के लिए आते-जाते हैं। ग्रामीणों ने कहा कि अगर वन विभाग ने समय रहते सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए तो कोई अनहोनी हो सकती है। वहीं वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि गुलदार को आबादी वाले इलाके से दूर भगाने की कोशिशें (Uttarakhand Leopard Curfew) की जा रही हैं। वन विभाग की टीम आबादी क्षेत्र के नजदीक सुबह-शाम दोनों समय गश्त कर रही है।