ग्रामीण क्षेत्रों में खबरें फैल रही हैं कि गल्ले की दुकान में मिलने वाले चावल में प्लास्टिक का चावल मिलाया गया है।
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कोमल नेगी
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Image: What is fortified rice which people are afraid to eat saying it is plastic
उत्तरकाशी: हमारी अगली खबर आपके स्वास्थ्य से जुड़ी है। इन दिनों उत्तराखंड के कई क्षेत्रों में गल्ले की दुकान से मिलने वाले चावलों को लेकर असमंजस से स्थिति बनी हुई है।
Fortified Rice Rumours In Uttarakhand
ग्रामीण क्षेत्रों में खबरें फैल रही हैं कि गल्ले की दुकान में मिलने वाले चावल में प्लास्टिक का चावल मिला है। हाल ये है कि कई जगह तो ग्रामीणों ने चावल खाना तक छोड़ दिया है। इस तरह की खबरें पूरी तरह भ्रामक और निराधार हैं। दरअसल सभी सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों में इस महीने मिलने वाले चावल में सरकार की ओर से कुपोषण जैसी बीमारी से निपटने के लिए सूक्ष्म तत्वों को सही मात्रा में मिलाया गया है। इन चावलों को फोर्टिफाइड चावल कहा जाता है। फोर्टिफाइड चावल का पाउडर विटामिन बी, फोलिक एसिड और आयरन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व को सही मात्रा में मिलाकर बनाए जाते हैं, जिससे कुपोषण जैसी बीमारियों से लोगों को बचाया जा सके। खाद्य पूर्ति विभाग की ओर से लोगों से अपील की गई है कि भ्रामक जानकारी से बचें। फोर्टिफाइड चावल पोषक तत्वों से युक्त होते हैं।
यह सूक्ष्म पोषक तत्व प्लास्टिक चावल की तरह ही दिखते हैं। यह प्लास्टिक का चावल नहीं है। विटामिन बी-12 फोलिक एसिड और आयरन जैसे सूक्ष्म तत्वों को चावल के साथ मिलाया गया है। कुछ दिन पहले उत्तरकाशी के पुरोला में ग्रामीणों ने प्लास्टिक चावल मिलने की शिकायत की थी। जिसका जिला खाद्य आपूर्ति विभाग ने खंडन किया है। खाद्य अधिकारियों ने बताया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के राशन में फोर्टिफाइड चावल मिलाकर दिया जा रहा है। जिसे लोग प्लास्टिक चावल कह रहे हैं, वो फोर्टिफाइड चावल है, जो कि पोषक तत्वों से युक्त है। इसी तरह चंपावत में भी ग्रामीणों की शिकायत थी कि चावल को पकाते समय पानी डालते ही प्लास्टिक की तरह दिखने वाले चावल ऊपर तैरते दिखते हैं, इससे लोग इसे प्लास्टिक का समझकर खाने से डर रहे हैं, हालांकि असल बात क्या है, ये हम आपको बता चुके हैं। इसलिए अफवाहों से बचें और दूसरों को भी जागरूक करें।