उत्तराखंड: पहाड़ में महिला ने नदी किनारे दिया जुड़वा को जन्म, नहीं बच सका एक बच्चा

पिथौरागढ़ जिले में एक महिला को मजबूरी और परेशानियों के चलते नदी किनारे जुड़वां बच्चों की डिलीवरी करनी पड़ी। सड़क और अस्पताल गांव से दूर होने के कारण हुई परेशानी।
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Delivery of woman on the river bank: Woman gives birth to twins on river bank
Image: Woman gives birth to twins on river bank

पिथौरागढ़: पहाड़ों में अक्सर औरतों को ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सड़क और अस्पताल की सुविधा न होने के कारण महिलाओं को ऐसी परेशानियों से अक्सर जूझना पड़ता है।

Woman gives birth to twins on river bank

पिथौरागढ़ जिले के एक दूरस्थ गांव में एक प्रसव महिला को उसके परिजन और गांव की आशा वर्कर अस्पताल ले जा रहे थे। गांव से सड़क 6 किलोमीटर दूर होने के कारण वे लोग महिला को पालकी में बैठाकर ले जा रहे थे। अस्पताल उनके गांव से 25 किलोमीटर दूर पड़ता है। लेकिन रास्ते में ही पालकी सवार गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। जिस कारण परिजनों और आशा वर्कर को महिला की डिलीवरी जबुजा नदी के तट पर करवानी पड़ी। महिला ने दो जुड़वा बच्चों को जन्म दिया जिनमें से एक बच्चा मृत निकला।

गर्भवती महिला को पालकी से ले जा रहे थे अस्पताल

रायसपाटा गांव की निवासी 35 वर्षीय हेमा देवी को उनके परिजन और गांव की आशा कार्यकर्ता अस्पताल ले जाने के लिए निकले थे। उन्होंने सड़क तक पहुंचने की बहुत कोशिश की। लेकिन सड़क गांव से 6 किलोमीटर दूर अंदर एक जंगल से शुरू होती है। उन लोगों का प्लान गर्भवती महिला को गौचर स्थित अस्पताल ले जाने का था, गौचर में स्त्री रोग विशेषज्ञ और प्रसव के लिए अन्य चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। लेकिन रास्ते में ही महिला को असहनीय प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। जिस कारण मजबूरन महिला की डिलवरी नदी के किनारे करनी पड़ी। जहां पर महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। जिनमे से एक बच्चा मृत पैदा हुआ हुआ।
वहां मौजूद आशा कार्यकर्ता पुष्पा देवी ने बताया की इतनी दुखद परिस्थितियों के बावजूद मां और जीवित बच्चे का स्वास्थ्य ठीक है।
ग्रामीण जीवन सिंह ने बताया कि रायसपाटा के लोग 2009 से सड़क की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हेमा की कहानी पहाड़ की गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने के खतरों को दिखाती है, जो कई बार उनके जीवन के लिए खतरा हो सकता है।