उत्तराखंड: बाबा रामदेव के शिष्यों ने रचा इतिहास, राष्ट्रीय योग महासंग्राम में जीते 22 स्वर्ण पदक

खेल फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित 27 और 28 जुलाई को राष्ट्रीय योग महासंग्राम में आचार्यकुलम ने शानदार प्रदर्शन करते अपनी सफलता का झंडा गाड़ा है।
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National Yoga Mahasangram: Acharya Kulam Won 22 Golds in National Yoga Mahasangram
Image: Acharya Kulam Won 22 Golds in National Yoga Mahasangram

हरिद्वार: स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण द्वारा स्थापित आवासीय शिक्षण संस्थान आचार्यकुलम के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय योग महासंग्राम में अद्भुत प्रदर्शन किया। उन्होंने 22 स्वर्ण, 4 रजत और 1 कांस्य पदक जीतकर विद्यालय और उत्तराखंड का नाम रोशन किया।

Acharya Kulam Won 22 Golds in National Yoga Mahasangram

राष्ट्रीय योग महासंग्राम में विभिन्न राज्यों से 150 योगी बालक-बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस प्रतियोगिता में आचार्यकुलम् ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 22 स्वर्ण, 4 रजत और 1 कांस्य पदक जीते जिससे राज्य और पतंजलि योग पीठ की प्रतिष्ठा बढ़ी। साथ ही आचार्यकुलम की छात्रा आविशी अवि ने बालिका वर्ग में ‘चैंपियन ऑफ चैंपियन’ की ट्रॉफी और ₹2100 का नगद पुरस्कार जीतकर संस्थान का नाम ऊंचा किया। उनके इस शानदार प्रदर्शन ने आचार्यकुलम की योग शिक्षा की गुणवत्ता को और भी उजागर किया। स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण, आचार्यकुलम की उपाध्यक्षा डॉ. ऋतंभरा शास्त्री ने विजेजा छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं दी।

  • क्या है आचार्यकुलम ?

    Acharya Kulam Won 22 Golds in National Yoga Mahasangram
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    Image: Acharya Kulam Won 22 Golds in National Yoga Mahasangram

    आचार्यकुलम् हरिद्वार में स्थित एक आवासीय शैक्षणिक संस्थान है जो गुरुकुल पद्धति की पारंपरिक शिक्षा को आधुनिक शिक्षा पद्धतियों के साथ समन्वित करता है। यहाँ पर विद्यार्थियों को पारंपरिक और आधुनिक शिक्षा का उत्कृष्ट मिश्रण प्राप्त होता है। आचार्यकुलम एक ऐसा स्कूल है जो गुरुकुल पद्धति पर आधारित वैदिक शिक्षा और आधुनिक सीबीएसई शिक्षा का एक अनूठा संयोजन प्रस्तुत करता है। यह संस्थान 5वीं से लेकर 12वीं कक्षा तक शिक्षा प्रदान करता है। यहाँ पर 8वीं कक्षा तक 50 प्रतिशत वैदिक और 50 प्रतिशत सीबीएसई का पाठ्यक्रम सिखाया जाता है। इसके बाद 8वीं कक्षा के बाद 25 प्रतिशत वैदिक और 75 प्रतिशत सीबीएसई का सिलेबस लागू होता है। इसके अलावा यह पहला स्कूल है जहाँ विद्यार्थियों को अंग्रेजी के समान ही संस्कृत में भी पारंगत किया जाता है।