इसरो ने भारत में 147 भूस्खलन संभावित जिलों की सूची जारी की है जिसमें उत्तराखंड के सभी 13 जिले शामिल हैं। दो जिले देशभर में भूस्खलन के सबसे खतरनाक जोन में स्थित हैं।
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Image: Two Most Landslide-Prone Districts in India are of Uttarakhand
रुद्रप्रयाग: इसरो ने भूस्खलन संभावित जगहों की सूची जारी की है भारत में 147 ऐसे जिले चिन्हित किये गए हैं जहां भूस्खलन का खतरा ज्यादा है। आपको जानकार हैरानी होगी इसमें उत्तराखंड के सभी 13 जिले शामिल हैं। यही नहीं, इसरो की रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड के दो जिले भूस्खलन से खतरे के मामले में पूरे देश में सबसे ऊपर हैं, ये दोनों जिले देशभर में भूस्खलन के सबसे खतरनाक जोन में स्थित हैं।
ISRO Report: Two Top Most Landslide-Prone Districts in India are of Uttarakhand
केरल के वायनाड जिले में 30 जुलाई को मेप्पाडी के पास पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन से भारी तबाही हुई, जिससे 300 से अधिक लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों घायल हो गए। विभिन्न राहत शिविरों में ढाई हजार से अधिक लोग रह रहे हैं। यह स्थिति अन्य राज्यों, विशेषकर उत्तराखंड के लिए एक चेतावनी है, जो हर साल इसी तरह की प्राकृतिक आपदाओं का सामना करता है। 31 जुलाई को उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के केदारघाटी और टिहरी के घनसाली में बादल फटने और भूस्खलन से आपदा आई और अब भी दोनों जगहों पर रेस्क्यू अभियान चल रहा है।
ISRO Landslide Atlas में उत्तराखंड के ये दो जिले टॉप पर
उत्तराखंड के दो पहाड़ी जिलों रुद्रप्रयाग और टिहरी पर भूस्खलन का सबसे अधिक खतरा है। इसरो (ISRO) के हैदराबाद स्थित नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) की ताजा 'लैंडस्लाइड एटलस' रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। भूस्खलन के खतरे वाली सूची में ये जिले शीर्ष स्थान पर हैं। नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर ने देश भर में भूस्खलन के दृष्टिकोण से संवेदनशील 147 जिलों की सूची जारी की है, जिसमें रुद्रप्रयाग पहले और टिहरी दूसरे स्थान पर हैं, इस लिस्ट में वायनाड 13वें स्थान पर है।
उत्तराखंड के सभी 13 जिले इस लिस्ट में शामिल
जहाँ रुद्रप्रयाग पहले और टिहरी दूसरे स्थान पर है। वहीं अन्य जिलों में चमोली 19वें, उत्तरकाशी 21वें, पौड़ी गढ़वाल 23वें और देहरादून 29वें स्थान पर हैं। भूस्खलन की दृष्टि से अन्य जिले भी संवेदनशील हैं, जिनमें बागेश्वर 50वें, चंपावत 65वें, नैनीताल 68वें, अल्मोड़ा 81वें, पिथौरागढ़ 86वें, हरिद्वार 146वें और ऊधमसिंह नगर 147वें स्थान पर हैं।
सरकार को उठाने होंगे प्रभावी कदम
एसडीसी फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष अनूप नौटियाल ने बताया कि वायनाड की आपदा से उत्तराखंड को विशेष सबक लेने की आवश्यकता है। उत्तराखंड सबसे संवेदनशील राज्य है और इसरो की रिपोर्ट में उत्तराखंड के दो जिलों का शीर्ष पर होना इस बात का संकेत है कि सरकार को अधिक सतर्कता बरतने और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। केवल आपदा के समय सक्रिय होने से दूरगामी परिणाम नहीं मिलेंगे। इसके लिए सरकार को व्यापक और दीर्घकालिक योजनाएँ बनानी होंगी।