इस वर्ष जनपद चमोली के सगर गांव से मां राजराजेश्वरी चंडिका देवी की देवरा यात्रा एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक आयोजन के रूप में शुरू हुई है।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Devra Yatra Starting After 100 Years Will Continue For 9 Months
चमोली: ग्रामीणों के लिए विशेष महत्व रखने वाली यह धार्मिक यात्रा 100 साल बाद फिर से आयोजित हुई। पिछली बार 1924 में हुई इस यात्रा को इस बार 12 अक्तूबर को विजयदशमी के मौके पर सगर गांव से शुरू किया गया।
Devra Yatra Starting After 100 Years Will Continue For 9 Months
मां चंडिका की डोली को लेकर देवरा यात्रा का मुख्य उद्देश्य है कि श्रद्धालुओं को विभिन्न गांवों और धार्मिक स्थलों पर देवी के दर्शन का अवसर मिले। यह यात्रा धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिसमें मां राजराजेश्वरी चंडिका देवी की डोली को श्रद्धालुओं के पास ले जाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर मिलता है। देवरा यात्रा न केवल लोगों के घर-परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती है, बल्कि सगर गांव की विवाहित बेटियों और बहनों (ध्याणियों) की कुशलक्षेम पूछने की परंपरा भी निभाती है। इस बार 100 वर्षों बाद फिर से आयोजित यह यात्रा 9 महीनों तक चलेगी और पंचकेदार, पंचबदरी, पंच प्रयाग जैसे कई प्रमुख धार्मिक स्थलों का भ्रमण करेगी। देवरा यात्रा पंचकेदार गद्दी स्थल ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने भव्य स्वागत किया। देवी की डोली के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना के साथ अपने परिवारों की सुख-समृद्धि की कामना की।
देवी चंडिका के आशीर्वाद से घर-घर पहुंचेगी सुख-समृद्धि
इस अवसर पर ग्रामीणों में देवी के प्रति गहरी आस्था और श्रद्धा का अद्भुत नजारा देखने को मिला। यात्रा समिति के अध्यक्ष जगमोहन सिंह बिष्ट ने बताया कि यह यात्रा 9 माह तक चलेगी और चमोली व रुद्रप्रयाग सहित अन्य जिलों के कई गांवों में भ्रमण करेगी। धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण यह यात्रा देवी के आशीर्वाद को जन-जन तक पहुंचाने का प्रतीक मानी जाती है। देवरा यात्रा के अंतर्गत देवी की डोली सगर गांव की विवाहित बेटियों और बहनों के ससुराल भी जाएगी, जहां देवी उनका कुशलक्षेम पूछते हुए आशीर्वाद प्रदान करेंगी। इस अनूठी परंपरा के पीछे ग्रामीणों की मान्यता है कि मां चंडिका देवी उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार करेंगी।