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Secret Himalayan Treks Near Kedarnath You’ve Never Heard Of
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टिहरी गढ़वाल: सोहलवीं सदी में लगभग 1603 - 1627 ई० के दौरान गढ़वाल राज्य की राजधानी श्रीनगर में महाराजा महीपत शाह जी राज्यशासन की जिम्मेदारी सम्भाले हुए थे। उस अवधि में गढ़वाल राज्य के दो प्रमुख सेनानायक, क्रमशः परम पराक्रमी वीरयोद्धा, माधोसिंह भंडारी एवं महान पराक्रमी वीरयोद्धा लोदी रिखोला गढ़वाली सेना की कमान संभाल रहे थे।
जब वीरभड़ लोधी रिखोला, गढ़वाल राज्य की दक्षिण - पूर्वी सीमा पर भाबर एवं कालागढ़ क्षेत्र में बहादुरी के साथ आक्रमणकारियों से लोहा ले रहे थे, तो उत्तरी सीमा पर भोटन्त देश (तिब्बत) के आक्रमणकारी निरन्तर अशान्ति पैदा करने में कोई कोर - कसर नहीं छोड़ना चाहते थे। यकायक भोटन्त देश के राजा शौका (शौकू) ने गढ़वाल राज्य पर आक्रमण करने की घोषणा कर दी। अतः महाराजा महीपत शाह जी महाराज ने राज्य के प्रमुख सेनापति वीरभड़ माधो सिंह भंडारी को गढ़वाली सेना के साथ भोटन्त देश तिब्बत की सीमा पर शौकू का आक्रमण रोकने की जिम्मेदारी सौंपी।