Advertisement
Secret Himalayan Treks Near Kedarnath You’ve Never Heard Of
Trails once used by sages, locals, and shepherds. Ideal for travelers seeking silence over social media fame.
Example Ads Media
देहरादून: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, गंगा-यमुना जैसी अन्य नदियां पिछले कुछ दशकों में अत्यधिक प्रदूषित हुई हैं। इसके परिणामस्वरूप जलीय जीवों का जीवन और मानव स्वास्थ्य को खतरा उत्तपन्न हो रहा है। वाडिया संस्थान के विशेषज्ञों के अनुसार यदि हमें अपनी नदिया स्वच्छ बनानी है तो हमें इसके लिए लॉकडाउन जैसी सख्ती वाले नियम बनाने होंगे।
वाडिया संस्थान द्वारा लॉकडाउन के दौरान गंगा और यमुना नदियों में भौतिक मापदंडों, प्रमुख और ट्रेस तत्वों, और स्थिर आइसोटोप (H2और H2O) प्रणाली के मूल डेटा पर रिसर्च की गई। इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने उत्तराखंड में आठ सप्ताह के लॉकडाउन के दौरान ऊपरी गंगा और यमुना नदी घाटियों सहित अन्य 34 स्थानों से जल के नमूने एकत्र किए। इस रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार लॉकडाउन के दौरान पानी में घुलित ऑक्सीजन (DO) में बड़ी मात्रा में वृद्धि हुई। लॉकडाउन के दौरान गंगा के ऊपरी बेसिन की जल गुणवत्ता में 93 प्रतिशत तक सुधार देखने को मिला।
वैज्ञानिक डॉ. समीर तिवारी ने बताया कि उत्तराखंड के अपर गंगा रिवर सिस्टम (UGRS) और अपर यमुना रिवर सिस्टम (UYRS) पर कोविड लॉकडाउन के दौरान एकत्रित आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। ये आंकड़े मई और जून 2020 के हैं, जब लॉकडाउन लागू था। लॉक डाउन के इन दो महीनों में उत्तराखंड की नदियों के पानी की गुणवत्ता में सुधार देखा गया। लॉक डाउन के दौरान सभी औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के ठप होने के कारण उद्योगों से निकलने वाला अपशिष्ट और जनता द्वारा की जाने वाली गंदगी लगभग समाप्त हो गई थी। इस कारण से उस समय गंगा और यमुना सहित राज्य की अन्य नदियों का पानी को बिना किसी उपचार के पीने योग्य पाया गया। उल्लेखनीय है कि नदियों में फैक्ट्रियों और नालों से गंदे पानी के प्रवाह के कारण जल प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है।