उत्तराखंड: 25 साल पहले गांव छोड़ बसे थे कनाडा, अब NRI ने कराई 21 गरीब बेटियों की शादी

कनाडाई एनआरआई ने 21 निर्धन कन्याओं का सामूहिक विवाह कर घर गृहस्थी का सामान देकर नव दंपतियों को आशीर्वाद दिया। उन्होंने लगभग तीन लाख साठ हजार स्कूल फीस जमा कर निजी स्कूल में बच्चों का दाखिला दिलाया।
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marriage of 21 poor girls: NRI arranged marriage of 21 poor girls
Image: NRI arranged marriage of 21 poor girls

उधमसिंह नगर: 25 वर्ष पूर्व कनाडा में जा बसे संदीप ग्रेवाल आज भी अपनी जड़ों से जुड़े हैं। कनाडाई एनआरआई ने 21 निर्धन कन्याओं का सामूहिक विवाह कर घर गृहस्थी का सामान देकर नव दंपतियों को आशीर्वाद दिया। पच्चीस साल पहले ग्राम सुनपहर छोड़ सात समंदर पर कनाडा के टोरंटों जा बसे संदीप ग्रेवाल का दिल आज भी भारत की माटी के लिए धड़कता है।

NRI arranged marriage of 21 poor girls

मंगलवार सुबह गुरुद्वारा हर गोविंद सिंह साहिब में कनाडा एनआरआई संदीप सिंह ग्रेवाल ने पहुंचकर 21 निर्धन कन्याओं ग्राम जादोपुर उपासना, सीमा, खुशबू, प्रियंका, मनीषा, सिमरन, प्रियंका, जानकी, तनुजा, निशा राना, हल्दी निवासी सविता, भदसरा पूनम कौर, ग्राम मेहरबान नगर पूनम, भिलय्या संगीता, कंचनपुरी सायरा, जोया, जाफरी, पीलीभीत सिमरन कौर, रघुलिया नमन कौर, ग्राम कुलारा सुजाता मंडल, हरदासपुर रुचि, मझोला हरजोत कौर आदि को दान दहेज व घर गृहस्थी का सामान उपहारस्वरूप नवविवाहित जोड़े को भेंट किया। वहीं यूपी-उत्तराखंड के छह गरीब छात्रों को गोद लिया।

निजी स्कूल में बच्चों को दिलाया दाखिला

यही नहीं, उन्होंने लगभग तीन लाख साठ हजार स्कूल फीस जमा कर निजी स्कूल में बच्चों का दाखिला दिलाया। गुरुद्वारा ग्रंथी दिलबाग सिंह सिंह व एनआरआई संदीप सिंह ग्रेवाल ने नवविवाहित जोड़ों का सिख परंपरा से विवाह संपन्न कराया। इस अवसर पर गुरुद्वारे में अखंड पाठ भोग रखा गया। साथ ही गुरुद्वारे में लंगर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन पूर्व कंचनपुरी समिति अध्यक्ष जसविंदर सिंह बाजवा ने किया।

  • गांव के लोगों की करते हैं मदद

    NRI arranged marriage of 21 poor girls
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    Image: NRI arranged marriage of 21 poor girls

    ग्रामीणों ने का कि इन निर्धन कन्याओं का विवाह कराकर संदीप ग्रेवाल ने बहुत पुण्य का कार्य किया है। संदीप आज भी अपने गांव को भूले नहीं हैं। वह बीच-बीच में गांव आते रहते हैं और सभी का सुख दुख सुनते हैं। गांव के लोगों को खुशी है कि उनके गांव का कोई व्यक्ति विदेश में भारत का नाम रोशन कर रहा है और साथ ही अपने गांव को भी नहीं भूला है।