उत्तराखंड: शादी के 34वें दिन खोया था सुहाग, अब सेना में अफसर बनकर ससुराल पहुंची सोनी बिष्ट

सोनी जब सेना में लेफ्टिनेंट बनने के बाद पहली बार अपने ससुराल पहुंची तो वहां पर सभी ससुरालियों ने सोनी का भव्य स्वागत किया..
Advertisement Cheapest Chardham Yatra 2026 Package? The Price Will Shock You!

Planning Chardham in 2026? These 5 Packages Are Getting Booked Fast

Example Ads Media
Indian Army Officer: Soni reached home after becoming officer
Image: Soni reached home after becoming officer

उधमसिंह नगर: उत्तराखंड की बेटियां आज के समय में हर क्षेत्र में अपनी सफलता का परचम लहरा रही हैं। बेटियां अपनी कड़ी मेहनत और लगन से हर मुकाम हासिल कर रही हैं और कई बेटियों के प्रेरणा बन रही हैं। इन्हीं साहसी बेटियों में बागेश्वर की सोनी बिष्ट का नाम भी जुड़ गया है, जिनकी शादी के मात्र 34 दिन बाद उनके पति की मौत हो गई थी।

Soni reached home after becoming officer

सोनी बिष्ट प्रतिष्ठित सीडीएस परीक्षा को पास कर सेना में लेफ्टिनेंट बनीं हैं। सोनी बिष्ट ने ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) चेन्नई की पासिंग आउट परेड में लेफ्टिनेंट अफसर शामिल हुईं अब वे आर्मी ऑर्डनेंस कॉर्प्स में अपनी सेवाएं देंगी। सोनी की पहली पोस्टिंग असम में हुई है, उनकी इस सफलता पर परिजन गर्व से भावुक हो गए। सोनी के पिता कुंदन सिंह बिष्ट, माता मालती बिष्ट और भाई राहुल बिष्ट भी पासिंग आउट परेड में शामिल हुए।

ऑफिसर बनके पहली बार पहुंची ससुराल

सोनी जब सेना में लेफ्टिनेंट बनने के बाद पहली बार अपने ससुराल पहुंची तो वहां पर सभी ससुरालियों ने सोनी का भव्य स्वागत किया. सोनी का ससुराल उधम सिंह नगर जिले के सीमान्त क्षेत्र खटीमा के भुड़ा किशनी गांव में है. जब गांव की बहू सोनी_बिष्ट सेना में लेफ्टिनेंट बनकर पहली बार अपनी ससुराल पहुंचीं। वहां पर ससुराल पक्ष और अन्य ग्रामीणों ने मिलकर सोनी का भव्य स्वागत किया। सोनी की इस बहादुरी की सबने सराहना की.

शादी के 34वें दिन खो दिया था सुहाग

बागेश्वर जिले में पैदा हुई सोनी बिष्ट ने इस सफलता को पाने के लिए अनेक कठिनाइयों का सामना किया है। वर्ष 2023 में सोनी की शादी खटीमा के नीरज भंडारी से हुई थी, जो "18 कुमाऊं रेजिमेंट" में सैनिक के रूप में कार्यरत थे। लेकिन शादी के महज 34 दिन बाद एक सड़क दुर्घटना में नीरज का निधन हो गया। इस घटना के बाद सोनी बिष्ट पूरी तरह से टूट गई थीं, लेकिन उनके ससुराल और मायके वालों ने इस कठिन समय में उनको हिम्मत दी।
जब सोनी इस दुखद घटना से उबरने लगी थीं, उसी समय उनके छोटे भाई राहुल को लकवा मार गया। इस दुःख के समय में सोनी ने खुद को संभाला और अपने पति के सपने को पूरा करने और उनकी यादों को जिंदा रखने की ठानी, उनके लिए ये सफर इतना आसान नहीं था लेकिन उन्होंने आगे बढ़ना ही सही विकल्प समझा। उसके बाद सोनी ने वीर नारी प्रवेश योजना के तहत सेना में शामिल होने का फैसला लिया। इसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की और सभी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट ऑफिसर बन गई।