Uttarakhand News: धराली मलबे में शवों को ढूंढना बेहद मुश्किल, दलदली जमीन और भारी बोल्डर बाधा

धराली बाजार में फैले करीब 30 से 40 फीट मलबे के नीचे दबे लोगों को ढूंढ पाना आसान नहीं है। यहां दलदली जमीन और बड़े-बड़े बोल्डर के बीच से शवों को ढूंढना अब नामुमकिन सा हो रहा है......
Advertisement ये ट्रेक्स गूगल मैप पर भी नहीं मिलेंगे! केदार हिमालय के छुपे हुए रास्ते

प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।

Example Ads Media
Dharali Disaster: Difficulty in finding bodies in Dharali debris
Image: Difficulty in finding bodies in Dharali debris

उत्तरकाशी: जनपद उत्तरकाशी के धराली में आपदा के बाद आज 9वें दिन बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। धराली मलबे में अब भी कई लोग दबे हुए हैं, जिनमें कुछ सेना के जवान भी शामिल हैं। सेना द्वारा स्निफर कुत्तों और अन्य कई उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। लेकिन यहां दलदली जमीन और बड़े-बड़े बोल्डर के बीच से शवों को ढूंढना मुश्किल हो रहा है।

Difficulty in finding bodies in Dharali Uttarkashi debris

उत्तरकाशी जिला प्रशासन ने धराली मलबे में अब भी 48 लोगों के गुमशुदा होने की सूची जारी की है। हालांकि, आने वाले दिनों में यह संख्या और भी बढ़ने की उम्मीद है। धराली में आई आपदा को एक हफ्ते से अधिक का समय हो गया है, लेकिन अब तक केवल कुछ एक शव ही ढूंढे जा सके हैं। खीरगंगा से आए लाखों टन मलबा धराली बाजार के ऊपर फैला हुआ है। धराली बाजार में स्थित 65 होटल, 30 से अधिक रिजॉर्ट और होमस्टे सहित कई दुकानें 25 से 30 फीट और कुछ स्थानों पर 40 फीट मलबे में दबे हैं।

नामुमकिन सा हो रहा है शवों को ढूंढना

धराली बाजार में फैले करीब 30 से 40 फीट मलबे के नीचे दबे लोगों को ढूंढ पाना आसान नहीं है। यहां दलदली जमीन और बड़े-बड़े बोल्डर के बीच से शवों को ढूंढना अब नामुमकिन सा हो रहा है। धराली में सेना और एसडीआरएफ टीमें भारी मशीनों और स्निफर डॉग्स की मदद लेने के बावजूद भी मलबे में दबे शवों को नहीं ढूंढ पा रही हैं।

बेलचे और फावड़े से खोदे जा रहे गड्ढे

आपदाग्रस्त क्षेत्र में स्निफर डॉग ने 10 से अधिक स्थानों पर मलबे के नीचे शवों की मौजूदगी का संकेत दिया है। लेकिन जब उन जगहों पर गड्ढे खोदे जाते हैं, तो शवों की बरामदगी नहीं हो पा रही है। इस दलदली जमीन पर भारी जेसीबी या पोकलैंड मशीनें नहीं पहुंचाई जा सकती हैं। ऐसे में एसडीआरएफ और सेना के जवान यहां गड्ढे खोदने का प्रयास करने हैं लेकिन बेलचे और फावड़े से बड़े-बड़े बोल्डर निकालने में कठिनाई हो रही है।