उत्तराखंड: तोताघाटी में सैकड़ों मीटर गहरी दरारें, विशेषज्ञों ने चेताया.. ढह सकता है पूरा पहाड़

प्रो. बिष्ट ने बताया कि ये दरारें सैकड़ों मीटर गहरी हैं, जो केवल सतह को ही नहीं, बल्कि पूरे पहाड़ को चीर रही हैं। इससे संकेत मिलता है कि खतरा पहाड़ की आंतरिक संरचना में गहराई तक छिपा है।
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Danger in Totaghati: Hundreds of meters deep cracks are appearing in Totaghati
Image: Hundreds of meters deep cracks are appearing in Totaghati

टिहरी गढ़वाल: तोताघाटी पर एक बड़ा भूगर्भीय खतरा मंडरा रहा है। दशकों से अपनी संकरी सड़कों, तीखे मोड़ों और चट्टानी भूभाग के लिए जानी जाने वाली तोताघाटी अब पहाड़ की चट्टानों में बड़ी-बड़ी दरारों और दरारों के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है।

Hundreds of meters deep cracks are appearing in Totaghati

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर ये दरारें और चौड़ी होती रहीं, तो पहाड़ का एक पूरा हिस्सा ढह सकता है, जिससे बद्रीनाथ, केदारनाथ और ऋषिकेश से गढ़वाल क्षेत्र के बड़े हिस्से तक पहुँच बंद हो सकती है।
वरिष्ठ भूविज्ञानी प्रो. महेंद्र प्रताप सिंह बिष्ट, जो पिछले तीन-चार दशकों से उत्तराखंड की पहाड़ियों और आंतरिक संरचनाओं का अध्ययन कर रहे हैं, ने बताया है कि तोताघाटी में चट्टानों की संरचनाओं की निगरानी के दौरान पिछले कुछ महीनों में कई खतरनाक दरारें पाई गई हैं।

विनाशकारी साबित हो सकती है तोताघाटी

प्रो. बिष्ट के अनुसार, इस क्षेत्र की चट्टानें चूना पत्थर से बनी हैं, जिनमें समय के साथ प्राकृतिक रूप से दरारें और क्लिंट (गहरी दरारें) विकसित हो जाती हैं। उन्होंने चेतावनी जारी की है कि तोताघाटी की स्थिति न केवल चारधाम तीर्थयात्रियों के लिए, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और सैन्य परिवहन के लिए भी विनाशकारी साबित हो सकती है। उनकी टीम नियमित रूप से ऐसे महत्वपूर्ण स्थानों की पहचान कर रही है और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण सहित विभिन्न विभागों को सूचित कर रही है।

पहाड़ की गहराई तक छिपा है खतरा

प्रो. बिष्ट ने बताया कि ये दरारें सैकड़ों मीटर गहरी हैं, जो केवल सतह को ही नहीं, बल्कि पूरे पहाड़ को चीर रही हैं। इससे संकेत मिलता है कि खतरा पहाड़ की आंतरिक संरचना में गहराई तक छिपा है। तोताघाटी में इन दरारों का निर्माण इस प्रकार है कि यदि ये दरारें चौड़ी हो जाती हैं या टूट जाती हैं, तो पहाड़ का एक पूरा हिस्सा नीचे खिसक सकता है। उन्होंने बताया कि तोता घाटी के ऊपर पहाड़ी पर बनी दरारों की चौड़ाई ढाई से तीन फीट तक है, जब हमने उन दरारों की गहराई जाँचने के लिए उनमें पत्थर डाला तो वो करीब 80 मीटर तक बिना आवाज किए हुए नीचे चला गया।

सिरोबगड़ में क्यों होता है बार-बार भूस्खलन

इसके अलावा प्रो. बिष्ट ने सिरोबगड़ के बारे बताया कि यहां भी बार-बार भूस्खलन आने से सड़क ढह जाती है। उन्होंने बताया कि सिरोबगड़ गढ़वाली के दो शब्दों से मिलकर बना है सेरा+बगड़। जिसमें सेरा का अर्थ जिसमें धान के खेती या रोपाई होती है और बगड़ का मतलब है बहना। जिस स्थान का नाम ही बगड़ है उस जगह पर सड़कें बनी हैं, तो तीव्र बारिश में इन सड़कों पर लैंड स्लाइड होगा।