राष्ट्रपति ने उत्तराखंड की प्रधानाध्यापिका डॉ. मंजूबाला और NSTI देहरादून के ट्रेनिंग ऑफिसर मनीष ममगाईं को "राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2025" से सम्मानित किया।
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Image: National Teacher Award 2025 to two teacher of Uttarakhand
चम्पावत: आज शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उत्तराखंड दो शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया। इन शिक्षकों को शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के अंतर्गत चयनित शिक्षकों को— सम्मान-पत्र, एक मेडल और पचास हजार रुपये की नकद राशि प्रदान की जाती है।
National Teacher Award 2025 to two teacher of Uttarakhand
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दिल्ली में आयोजित विशेष समारोह में देशभर से आए शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा, “हमारी प्राचीन परंपरा ‘आचार्य देवो भव’ शिक्षक को सर्वोच्च स्थान देती है। शिक्षा भी भोजन, वस्त्र और आवास की तरह ही व्यक्ति की गरिमा और सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा शिक्षकों के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार यही है कि उनके विद्यार्थी जीवनभर उन्हें याद रखें और परिवार, समाज तथा राष्ट्र के लिए उल्लेखनीय योगदान दें।” इस विशेष समारोह के मौके पर राष्ट्रपति ने देशभर के कई शिक्षकों के साथ उत्तराखंड के दो शिक्षकों को भी राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया।
मनीष ममगाई और डॉ मंजूबाला हुए सम्मानित
राष्ट्रपति ने उत्तराखंड के जिन दो शिक्षकों को सम्मानित किया वे चंपावत जिले के प्राथमिक विद्यालय च्यूरानी की प्रधानाध्यापिका डॉ. मंजूबाला और NSTI देहरादून के ट्रेनिंग ऑफिसर मनीष ममगाईं हैं। प्रधानाध्यापिका डॉ. मंजूबाला को शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और समर्पण के लिए यह सम्मान मिला है। वहीं देहरादून राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (NSTI) के ट्रेनिंग ऑफिसर मनीष ममगाईं को शिक्षा और कौशल विकास में नवाचारपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उन्होंने युवाओं को रोजगारपरक कौशल से जोड़ने और नई पीढ़ी को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रशंसनीय कार्य किए हैं।
हिंदी, अंग्रेजी और कुमाऊँनी पढ़ाती है मधुबाला
57 वर्षीय डॉ. मंजूबाला 2005 से प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत हैं। वे विद्यालय के बच्चों के साथ-साथ हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर के विद्यार्थियों को भी अंग्रेजी की कोचिंग देती हैं। वे बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी और कुमाऊँनी तीन भाषाओं में पढ़ाती हैं। इस त्रिभाषा पद्धति ने शिक्षा को बच्चों के लिए सहज और रोचक बना दिया है। नियमित कक्षाओं के अलावा वे शाम की कक्षाएँ (इवनिंग क्लासेस) भी चलाती हैं, वे स्काउट एवं गाइड गतिविधियों में भी सक्रिय योगदान देती हैं। नई शिक्षा नीति में जिस त्रिभाषा तकनीक को प्रोत्साहन दिया जा रहा है, उसका जीवंत उदाहरण मंजूबाला का कार्य है।