मेजर प्रिया सेमवाल ने अपनी बहादुरी, निडरता और मेहनत के दम पर मेजर प्रिया ने यह साबित किया कि महिलाएं किसी भी कार्य के लिए असक्षम नहीं हैं। उन्होंने एक मां, पत्नी और सैनिक के रूप में हर भूमिका पूरी निष्ठा और समर्पण से निभाई।
Advertisement
90% ट्रेकर्स नहीं जानते केदार हिमालय के ये सीक्रेट रूट्स
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
Example Ads Media
Image: Major Priya Semwal first permanent commissioned woman officer
देहरादून: "ज़िंदगी का सबसे गहरा दर्द ही इंसान को सबसे ऊँची उड़ान भरना सिखाता है।" ऐसी ही मिसाल हैं उत्तराखंड की बेटी मेजर प्रिया सेमवाल, जिन्होंने पति के शहीद होने के बाद हिम्मत को अपना हथियार बनाया। उन्होंने निश्चय किया कि जिस वर्दी के लिए उनके पति ने अपने प्राण न्यौछावर किए, उसी वर्दी को वो स्वयं भी पहनेंगी। आज वे भारतीय सेना और उत्तराखंड की पहली महिला अफसर हैं जिन्हें स्थायी कमीशन प्राप्त हुआ है।
Major Priya Semwal first permanent commissioned woman officer
उत्तराखंड के देहरादून जिले के धोरण खास (या धोरान खास) की निवासी मेजर प्रिया आज उत्तराखंड ही नहीं, पूरे भारत की बेटियों के लिए प्रेरणा है। वे बचपन से ही मेधावी रही हैं, उन्होंने गणित में MSC, बीएड और फिर बीटेक की पढ़ाई पूरी की। उसके बाद साल 2006 में उनकी शादी नायक अमित शर्मा से हुई। दोनों की एक प्यारी बेटी है, जिसका नाम ख्वाहिश है। लेकिन साल 2012 में अरुणाचल प्रदेश में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान नायक अमित शर्मा शहीद हो गए। पति के शहीद होने के बाद प्रिया काफी टूट गई थी, लेकिन उसने अपने को किसी तरह संभाला और इस गहरे दुख को अपनी ताकत में बदल दिया। उन्होंने निश्चय किया कि जिस वर्दी के लिए उनके पति ने अपने प्राण न्यौछावर किए, उसी वर्दी को वो स्वयं भी पहनेंगी।
2014 में बनी थी लेफ्टिनेंट
कठिन प्रशिक्षण और चयन प्रक्रिया पार करने के बाद साल 2014 में प्रिया ने चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) से प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना की इलेक्ट्रिकल एंड मैकेनिकल इंजीनियरिंग (EME) कोर में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त किया। जिसके बाद प्रिया भारत की पहली ऐसी महिला बनीं, जो किसी शहीद नॉन-कमिशन्ड ऑफिसर की पत्नी होते हुए सेना में अधिकारी बनीं। मेजर प्रिया की वीरता सिर्फ जमीनी मोर्चों तक ही सीमित नहीं रही। बल्कि 2022 में वे भारतीय सेना की पहली ऑल-वूमेन सेलबोट एक्सपीडिशन टीम का हिस्सा बनीं। इस टीम ने प्रिया के नेत्रित्व में नौसेना की नौका INSV बुलबुल से गोवा, कारवार, मुंबई और कोच्चि तक लगभग 900 नॉटिकल मील (1,667 किलोमीटर) की कठिन समुद्री यात्रा पूरी की। इस दौरान प्रिया ने नेतृत्व, सुरक्षा और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाली और यह साबित किया कि महिलाएं हर चुनौती का सामना कर सकती हैं।
स्थायी कमीशन प्राप्त करने वाली पहली महिला अधिकारी
मेजर प्रिया सेमवाल लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन का हिस्सा भी रहीं, जहां उन्होंने इजरायल-लेबनान सीमा की तनावपूर्ण स्थिति में शांति स्थापना में अहम योगदान दिया। इसके अलावा वे भारतीय सेना की पहली महिला अधिकारी हैं जिन्हें स्थायी कमीशन मिला है। उत्तराखंड में स्थायी कमीशन प्राप्त करने वाली भी पहली महिला अफसर मेजर प्रिया ही हैं। अपनी बहादुरी, निडरता और मेहनत के दम पर मेजर प्रिया ने यह साबित किया कि महिलाएं किसी भी कार्य के लिए असक्षम नहीं हैं। उन्होंने एक मां, पत्नी और सैनिक के रूप में हर भूमिका पूरी निष्ठा और समर्पण से निभाई। उनके इस असाधारण योगदान और साहस के लिए उन्हें राज्य का प्रतिष्ठित तीलू रौतेली सम्मान भी प्रदान किया गया है।