उत्तराखंड: पतंजलि पर कोर्ट ने लगाया जुर्माना, सरकारी जांच में मानकों से कम पाया गया घी

पिथौरागढ़ की अदालत ने पतंजलि के गौघृत को मानकों से कम गुणवत्ता वाला पाए जाने पर कंपनी, वितरक और रिटेलर पर जुर्माना लगाया है। पतंजलि ने फैसले को गलत बताते हुए इसे उच्च अधिकरण में चुनौती देने का निर्णय लिया है।
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Patanjali fined by court: Court imposed fine on Patanjali company
Image: Court imposed fine on Patanjali company

पिथौरागढ़: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में स्थित एक अदालत ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड और दो अन्य पक्षों पर आर्थिक दंड लगाया है। दरअसल सरकारी जांच में पतंजलि के एक बैच का गौघृत (घी) मानकों से कम गुणवत्ता वाला पाया गया। यह मामला वर्ष 2020 से चल रहा है, जब नियमित निरीक्षण के दौरान एक सैंपल लिया गया था। पतंजलि ने अदालत के निर्णय पर सवाल उठाते हुए इसे चुनौती देने की तैयारी की है और ऊपरी अदालत में अपील दायर करने का निर्णय लिया है।

Court imposed fine on Patanjali company

पिथौरागढ़ के ADM/न्यायिक अधिकारी ने आदेश जारी करते हुए कहा कि पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड, अहमदनगर पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। इसके अलावा ब्रहम एजेंसिज़ (डिस्ट्रिब्यूटर) पर 25,000 रुपये, करण जनरल स्टोर (रिटेलर) पर 15,000 रुपये का दंड लगाया गया है। यह मामला 20 अक्टूबर 2020 को तब शुरू हुआ जब खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने काशानी, पिथौरागढ़ के एक दुकान से घी का सैंपल लिया। बिल की जांच में पता चला कि यह घी ब्रहम एजेंसिज़, धारचूला रोड के माध्यम से आया था और इसे पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड, अहमदनगर द्वारा पैक किया गया था। सैंपल को राज्य खाद्य एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशाला, रुद्रपुर भेजा गया। सहायक आयुक्त आर.के. शर्मा के अनुसार—प्रयोगशाला की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से घी को मानकों से कम गुणवत्ता वाला घोषित किया गया।

केंद्रीय प्रयोगशाला की रिपोर्ट

रिपोर्ट की जानकारी पतंजलि को वर्ष 2021 में दी गई। कंपनी ने इन निष्कर्षों पर आपत्ति जताते हुए सैंपल को केंद्रीय प्रयोगशाला में जाँच कराने की मांग की और इसके लिए 5,000 रुपये जमा किए। अगले ही दिन नमूना केंद्रीय खाद्य परीक्षण एजेंसी, गाज़ियाबाद भेजा गया। नवंबर 2021 में आई केंद्रीय प्रयोगशाला की रिपोर्ट में भी यही निष्कर्ष निकला कि पतंजलि का गौघृत गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा।

अदालत ने तीनों पक्षों पर लगाया जुर्माना

दोनों रिपोर्टों के आधार पर विभाग ने फरवरी 2022 में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के अंतर्गत मामला दर्ज किया। नोटिस जारी होने के बाद सुनवाई शुरू हुई। गुरुवार, 27 नवंबर, को अदालत ने तीनों पक्षों पर जुर्माना लगाते हुए निर्देश दिया कि खाद्य सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। पतंजलि के एक अधिकारी ने अदालत के फैसले को खारिज करते हुए इसे “त्रुटिपूर्ण और अवैध” कहा है। कंपनी का कहना है कि वह इस आदेश के विरुद्ध फूड सेफ्टी ट्रिब्यूनल में अपील दायर कर रही है।