उत्तराखंड: जिस IPS ने किया मानवाधिकार हनन, वही अब शांति स्थापना के काम में.. क्या हो सकेगी कार्रवाई ?

उत्तराखंड के पूर्व IPS लोकेश्वर सिंह पर बड़ा आरोप है, लोकेश्वर सिंह पिथौरागढ़ के व्यापारी को निर्वस्त्र कर पीटने के मामले में दोषी ठहराए गए हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि ऐसे पुलिस अधिकारियों पर क्या कार्रवाई संभव है ? पढ़िए..
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IPS Lokeshwar Singh: IPS officer Lokeshwar Singh accused of human rights violations
Image: IPS officer Lokeshwar Singh accused of human rights violations

पिथौरागढ़: उत्तराखंड पुलिस को ‘मित्र पुलिस’ के रूप में पेश किया जाता है, लेकिन राज्य में तैनात रहे एक पूर्व IPS अधिकारी ने ऐसी हरकत कर दी जिसने पूरे पुलिस तंत्र की छवि पर सवाल खड़े कर दिए। यह मामला पूर्व IPS लोकेश्वर सिंह से जुड़ा है, जिन्हें एक व्यापारी को कथित रूप से निर्वस्त्र कर पिटाई करने के मामले में पुलिस शिकायत प्राधिकरण ने दोषी करार दिया है।

IPS officer Lokeshwar Singh accused of human rights violations

यह विवाद फरवरी 2023 में पिथौरागढ़ का है। वहां एक RTI कार्यकर्ता और कपड़ा व्यापारी लक्ष्मी दत्त जोशी पुलिस लाइन परिसर के बाहर फैली गंदगी की शिकायत लेकर SP कार्यालय पहुंचे थे। आरोप है कि शिकायत सुनकर IPS लोकेश्वर सिंह नाराज़ हो गए और व्यापारी को एक ऐसे कमरे में ले गए जहां कोई CCTV मौजूद नहीं था।

व्यापारी ने लगाए गंभीर आरोप

पिथौरागढ़ के लक्ष्मी दत्त के अनुसार उन्हें कपड़े उतरवाने पर मजबूर किया गया, कमरे में उनकी पिटाई की गई। मामले में 6 अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका भी सामने आई है। घटना बाहर बताने पर लक्ष्मी दत्त को झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी गई, लेकिन पीड़ित ने हिम्मत नहीं हारी और पिटाई के बाद पीड़ित सीधे सरकारी अस्पताल पहुंचे।

मेडिकल रिपोर्ट ने खोले राज

मेडिकल रिपोर्ट में लक्ष्मी दत्त पर कई चोटों की पुष्टि हुई , एक्स-रे में भी गंभीर चोटें दर्ज हुईं जिसके बाद शिकायत पुलिस शिकायत प्राधिकरण तक पहुंची।

11 साल की सेवा और अचानक इस्तीफा

हिमाचल प्रदेश मूल के लोकेश्वर सिंह उत्तराखंड के तेज-तर्रार और चर्चित IPS अफसरों में गिने जाते थे। उन्होंने राज्य में लगभग ग्यारह साल तक सेवा दी और कई जिलों में कप्तान रहे। अपने कड़े रवैये और सीधे व्यवहार के कारण वे अक्सर चर्चा में रहते थे। लेकिन अचानक उन्होंने पुलिस सेवा से इस्तीफ़ा देकर संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध एक संगठन में सेवाएं शुरू कर दीं।

तीन विरोधाभासी एफिडेविट - IPS खुद फंस गए

सुनवाई के दौरान प्राधिकरण ने कई बार IPS अधिकारी को तलब किया, लेकिन वे व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुए। उन्होंने तीन अलग-अलग एफिडेविट भेजे, जो एक-दूसरे से विरोधाभासी थे और पीड़ित के दावों को और मजबूत करते थे। यह भी सामने आया कि अधिकारी के समर्थन में जमा कराए गए दो कथित “पत्रकारों” के हलफनामों की भाषा भी एक जैसी थी, जिन्हें प्राधिकरण ने संदिग्ध माना।

दोषी साबित हुए IPS लोकेश्वर सिंह

जब SP कार्यालय की CCTV फुटेज मांगी गई, तो फुटेज उपलब्ध नहीं कराई गई, जबकि कोतवाली की फुटेज मिल गई। आखिरकार प्राधिकरण ने 12 पन्नों का फैसला जारी कर IPS लोकेश्वर सिंह को दोषी माना। यह विडंबना है कि जिस अधिकारी पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप साबित हुआ, वही अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति एवं मानवाधिकार संबंधी परियोजनाओं में शामिल हैं।

अधिकारी अब नौकरी में नहीं, कैसे होगी कार्रवाई ?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अधिकारी पुलिस सेवा छोड़ चुके हैं, तो उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई कैसे लागू होगी? फिर भी, प्राधिकरण ने राज्य के गृह विभाग को कार्रवाई के निर्देश भेजे हैं। इस्तीफ़ा देने के बाद लोकेश्वर सिंह ने एक UN-affiliated संगठन ज्वाइन किया है, जहां वे शांति स्थापना, संस्थागत अखंडता, सतत विकास जैसे वैश्विक उद्देश्यों पर कार्य कर रहे हैं।