दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग और मारपीट के मामले में प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए 9 एमबीबीएस छात्रों को तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया है। दो छात्रों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है और हॉस्टल से स्थायी निष्कासन किया गया है।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: 9 MBBS students suspended in Doon Medical College ragging case
देहरादून: राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, देहरादून में सामने आए रैगिंग और मारपीट के गंभीर मामले में कॉलेज प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए एमबीबीएस के 9 छात्रों को तीन महीने के लिए अकादमिक गतिविधियों से निष्कासित कर दिया है। इनमें से दो छात्रों पर 50-50 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है और उन्हें हॉस्टल से स्थायी रूप से बाहर कर दिया गया है।
9 MBBS students suspended in Doon Medical College ragging case
दरअसल राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस 2025 बैच के एक छात्र के साथ मारपीट की घटना सामने आई थी। आरोप है कि उसी बैच के एक छात्र ने 2023 और 2024 बैच के दो सीनियर छात्रों के दबाव में पीड़ित छात्र की पिटाई की। मामले के उजागर होने के बाद कॉलेज प्रशासन ने सीनियर छात्रों के अभिभावकों को तलब किया और जांच एंटी रैगिंग कमेटी को सौंपी। जांच के बाद पहले दो छात्रों को हॉस्टल से निष्कासित किया गया और अब कुल 9 छात्रों को तीन महीने के लिए निलंबित करते हुए कुछ पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
कॉलेज प्रशासन पूरी तरह सतर्क
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, देहरादून में हुई इस घटना के बाद कॉलेज प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। एंटी रैगिंग सेल को सुबह और शाम पूरे कैंपस में नियमित गश्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही छात्रावासों में सिक्योरिटी गार्डों की ड्यूटी में बदलाव किया गया है। खास तौर पर एमबीबीएस फर्स्ट ईयर हॉस्टल के बाहर अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की गई है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
एंटी रैगिंग सेल को किया गया पुनः सक्रिय
मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने हॉस्टल के मुख्य वार्डन, अन्य वार्डन और एंटी रैगिंग सेल को दोबारा सक्रिय करते हुए सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि आने वाले समय में किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियम उल्लंघन को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर तत्काल कठोर कार्रवाई होगी।
सात अन्य छात्रों पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई
कॉलेज के मीडिया इंचार्ज और नेत्र रोग विभाग के एचओडी डॉ. सुशील ओझा ने बताया कि जिन अन्य सात छात्रों पर कार्रवाई की गई है, वे सीधे तौर पर मारपीट में शामिल नहीं थे, लेकिन जांच में यह पाया गया कि वे ईव टीजिंग और मानसिक रूप से परेशान करने जैसी गतिविधियों में संलिप्त थे। एंटी रैगिंग कमेटी की संस्तुति के आधार पर इन छात्रों को भी दोषी मानते हुए अनुशासनात्मक कदम उठाए गए।
सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी
डॉ. ओझा के अनुसार, कॉलेज प्रशासन इस कार्रवाई के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश देना चाहता है कि सिर्फ शारीरिक हिंसा ही नहीं, बल्कि मानसिक उत्पीड़न या छेड़छाड़ भी रैगिंग के दायरे में आती है। ऐसी किसी भी छोटी या बड़ी घटना पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।