पोखरी विकास खंड के डुंगर गांव में वर्षों से सड़क सुविधा नहीं मिलने पर ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर निर्माण शुरू किया। वन विभाग ने इसे वन कानून का उल्लंघन बताते हुए काम रुकवा दिया, जिससे विवाद बढ़ गया।
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Image: forest department has stopped road construction in Dungar village
चमोली: पोखरी विकास खंड का डुंगर गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित है। वर्षों से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने के बावजूद जब गांव तक सड़क नहीं पहुंची, तो ग्रामीणों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर खुद सड़क बनाने का फैसला कर लिया। हालांकि, यह पहल उस समय विवाद में बदल गई जब वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य को रुकवा दिया। इसके बाद ग्रामीणों और विभागीय कर्मचारियों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
forest department has stopped road construction in Dungar village
चमोली जिले के पोखरी विकास खंड में स्थित डुंगर गांव के ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से सड़क सुविधा की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्या पर कभी गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे में मजबूरी में ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से चंदा एकत्र कर सड़क कटिंग और निर्माण कार्य शुरू किया, ताकि गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ा जा सके। सड़क निर्माण की सूचना मिलने पर अलकनंदा भूमि संरक्षण वन प्रभाग की नागनाथ रेंज की टीम मौके पर पहुंची। वन क्षेत्राधिकारी बी.एल. शाह ने बताया कि बिना अनुमति सड़क निर्माण और कटिंग का कार्य वन कानूनों का उल्लंघन है। इसी आधार पर विभाग ने तत्काल प्रभाव से निर्माण कार्य रुकवा दिया।
ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच हुई तीखी बहस
वन विभाग के हस्तक्षेप के बाद मौके पर मौजूद ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई। सड़क को लेकर वर्षों से परेशान ग्रामीणों और वन विभाग के कर्मचारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। ग्रामीणों का कहना था कि जब सरकार और प्रशासन उनकी समस्या नहीं सुन रहे, तो उन्हें अपने गांव के विकास के लिए यह कदम उठाना पड़ा।
ऐतिहासिक गांव आज भी बुनियादी सुविधा से वंचित
ग्रामीणों ने बताया कि डुंगर गांव का इतिहास काफी समृद्ध है। यह गांव ब्रिटिश शासनकाल में ‘राय बहादुर’ की उपाधि प्राप्त स्वर्गीय डॉ. पातीराम परमार का गांव रहा है। इसके बावजूद आज भी यहां के लोग सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं।
ग्राम प्रधान का दर्द: कार्रवाई से बढ़ी परेशानी
डुंगर गांव की ग्राम प्रधान दीक्षा बर्तवाल ने कहा कि गांव आज भी सड़क से कटा हुआ है। मजबूरी में ग्रामीणों ने खुद काम शुरू किया था, लेकिन अब वन विभाग की कार्रवाई से उनकी परेशानी और बढ़ गई है। उन्होंने प्रशासन से मामले में संवेदनशीलता दिखाने और समाधान निकालने की मांग की है।
वन विभाग का पक्ष
वन क्षेत्राधिकारी बी.एल. शाह ने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति सड़क निर्माण करना कानूनन गलत है। उन्होंने कहा कि फिलहाल निर्माण कार्य रोक दिया गया है और आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।
डुंगर गांव की यह घटना एक बार फिर पहाड़ों में सड़क, विकास और वन कानूनों के बीच टकराव को उजागर करती है। जहां एक ओर ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कानूनी प्रक्रियाएं उनके रास्ते में बाधा बन रही हैं। अब सवाल यह है कि प्रशासन इस समस्या का स्थायी और मानवीय समाधान कब निकालेगा।