हिमालयी क्षेत्र में धार्मिक ग्रंथों में वर्णित आठ ‘ॐ’ पर्वतों में से अब तक दो की ही पहचान हो सकी है, जहां बर्फ जमने पर पर्वत पर ‘ॐ’ की प्राकृतिक आकृति स्पष्ट दिखाई देती है।
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No reels. No crowds. Just Kedar Himalaya - This trek doesn’t want to be famous..
Alpine meadows, dense forests, and snow-capped peaks in one journey. Suitable for both beginner and experienced trekkers.
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Image: other Om-shaped mountain has been discovered in Nagaling Pithoragarh
पिथौरागढ़: हिमालयी क्षेत्र में धार्मिक ग्रंथों में वर्णित आठ ‘ॐ’ पर्वतों में से अब तक केवल दो ओम पर्वतों की पहचान हो सकी है। इन पर्वतों की खासियत यह है कि बर्फ जमने पर उनकी प्राकृतिक संरचना में ‘ॐ’ का स्पष्ट स्वरूप उभर आता है, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व का प्रतीक माना जाता है। इन पर्वतों को लेकर न सिर्फ श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है, बल्कि भूगोलवेत्ताओं और शोधकर्ताओं के लिए भी यह एक रोचक प्राकृतिक रहस्य बना हुआ है।
Another Om-shaped mountain has been discovered in Nagaling, Pithoragarh
अब तक पहचाने गए ओम पर्वतों में सबसे प्रसिद्ध पर्वत ब्यास घाटी में नावीढांग के पास स्थित है। यहां बर्फबारी के दौरान पर्वत की सतह पर उभरने वाला ‘ॐ’ का स्वरूप दूर से ही स्पष्ट दिखाई देता है। इसी कारण यह क्षेत्र वर्षों से तीर्थयात्रियों, प्रकृति प्रेमियों और शोधकर्ताओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मौसम साफ होने पर यह आकृति अत्यंत स्पष्ट नजर आती है, जिससे श्रद्धालु इसे ईश्वरीय चमत्कार के रूप में देखते हैं।
दारमा घाटी का ओम पर्वत, आस्था का प्राचीन केंद्र
दूसरा ओम पर्वत दारमा घाटी के नागलिंग गांव के पास स्थित है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह पर्वत प्राचीन काल से ही धार्मिक स्थल के रूप में जाना जाता रहा है। गांव के लोग पीढ़ियों से यहां पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। इस पर्वत की जड़ में नाग की आकृति मानी जाती है, जिसके कारण गांव का नाम नागलिंग पड़ा। इसी क्षेत्र से एक छोटी नदी निकलती है, जो आगे चलकर धौलीगंगा नदी की सहायक नदी बनती है। पर्वत के उत्तर दिशा में भव्य पंचाचूली पर्वत शृंखला स्थित है, जो इस क्षेत्र की सुंदरता को और बढ़ा देती है।
बर्फ की मोटाई से बदलता है ‘ॐ’ का आकार
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जब पर्वत पर बर्फ की मात्रा कम होती है, तब ‘ॐ’ की आकृति अधिक बड़ी और स्पष्ट दिखाई देती है। यह बर्फ वर्षभर बनी रहती है। वहीं, भारी हिमपात के बाद भी ‘ॐ’ की आकृति दिखाई तो देती है, लेकिन उसका आकार अपेक्षाकृत छोटा प्रतीत होता है। यह प्राकृतिक बदलाव इस पर्वत को और भी रहस्यमयी बना देता है। नागलिंग गांव से लगभग 150 मीटर की चढ़ाई के बाद हिमचुली का वयाशी बुग्याल आता है, जहां से सामने ओम पर्वत के दर्शन होते हैं। शीतकाल में यह पूरा क्षेत्र कई फीट बर्फ से ढका रहता है। पश्चिमी दिशा में स्थित स्थानों से सर्दियों में भी ओम पर्वत के दर्शन संभव होते हैं।
दारमा घाटी का अनोखा प्राकृतिक चमत्कार
ओम पर्वत के पास स्थित दारमा गांव में एक और अद्भुत प्राकृतिक घटना देखने को मिलती है। दिसंबर से अप्रैल के बीच, जब सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर बढ़ता है, तब पर्वत शृंखलाओं के कारण दिन में सात बार सूर्य पहाड़ों के पीछे छिप जाता है। स्थानीय लोग कहते हैं कि इस अवधि में गांव में सात बार सूर्योदय और सात बार सूर्यास्त जैसा अनुभव होता है। इसी कारण इस दौरान ग्रामीण माइग्रेशन कर निचली घाटियों में निवास करते हैं। वर्ष के अन्य महीनों में सूर्य उदय से अस्त तक गांव में पर्याप्त धूप रहती है और तब ग्रामीण अपने गांव में ही रहते हैं।
शेष ओम पर्वतों की खोज की जरूरत
धार्मिक मान्यताओं और प्राकृतिक विविधताओं के इस अनूठे संगम को लेकर क्षेत्र में लगातार रुचि बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालय में वर्णित शेष छह ओम पर्वतों की पहचान के लिए व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन, सैटेलाइट सर्वे और स्थानीय ज्ञान का सहारा लेना आवश्यक है। यदि भविष्य में अन्य ओम पर्वतों की खोज होती है, तो इससे न केवल हिमालयी रहस्यों से पर्दा उठेगा, बल्कि उत्तराखंड का धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।