Uttarakhand News: फ्रांस से 6500 किमी दूर अल्मोड़ा पहुंची बारात, कसार देवी में ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय विवाह

फ्रांस की राजधानी पेरिस से 6500 किलोमीटर दूर अल्मोड़ा के कसार देवी में हुआ भव्य अंतरराष्ट्रीय विवाह। श्रीपूर्णा जोशी और फ्रांसीसी दूल्हे और्हेल्यै गुरेलिएन ने पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों से लिए सात फेरे। विदेशी मेहमान भी दिखे कुमाऊंनी परिधानों में..
Advertisement 90% ट्रेकर्स नहीं जानते केदार हिमालय के ये सीक्रेट रूट्स

प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।

Example Ads Media
Almora International Wedding: Almora girl and French boy get married at Kasar temple
Image: Almora girl and French boy get married at Kasar temple

अल्मोड़ा: भारत से करीब साढ़े 6 हजार किलोमीटर दूर यूरोप के देश फ्रांस की राजधानी पेरिस से उत्तराखंड के सांस्कृतिक नगर अल्मोड़ा तक जब बारात पहुंची, तो यह नजारा किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। पारंपरिक ढोल-दमाऊं, रणसिंघा और पहाड़ी वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच बारात कसार देवी पहुंची और भारतीय रीति-रिवाजों से संपन्न हुआ यह विवाह इतिहास में दर्ज हो गया।

Almora girl and French boy get married at Kasar devi temple

12 फरवरी को कसार देवी क्षेत्र स्थित एक रिजॉर्ट में आयोजित इस भव्य समारोह ने भारतीय और यूरोपीय संस्कृतियों के अद्भुत संगम को जीवंत कर दिया। चीनाखान निवासी श्रीपूर्णा जोशी ने फ्रांस के और्हेल्यै गुरेलिएन के साथ वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों से सात फेरे लिए। अल्मोड़ा, जिसे उत्तराखंड की सांस्कृतिक राजधानी कहा जाता है, एक बार फिर अपनी परंपराओं, आध्यात्मिकता और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण सुर्खियों में आ गया।

कौन हैं दुल्हन श्रीपूर्णा जोशी?

श्रीपूर्णा जोशी, ओएनजीसी से सेवानिवृत्त अधिकारी ध्रुव रंजन जोशी और प्रतिभा जोशी की पुत्री हैं। उन्होंने दिल्ली से मास कम्युनिकेशन में स्नातक, भारतीय विद्या भवन से टेलीविजन एवं फिल्म प्रोडक्शन में स्नातकोत्तर तथा ग्राफिक डिजाइन में डिप्लोमा किया है। उच्च शिक्षा के लिए वह फ्रांस गईं, जहां वर्तमान में एक कंपनी में कार्यरत हैं। दूल्हे और्हेल्यै गुरेलिएन भारतीय संस्कृति से विशेष रूप से प्रभावित बताए गए। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा “अल्मोड़ा की प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक वातावरण और स्थानीय परंपराओं ने मुझे गहराई से प्रभावित किया। यूरोप में विवाह स्थलों की कमी नहीं है, लेकिन भारतीय संस्कृति और उत्तराखंड की आध्यात्मिक शांति ने मुझे यहां विवाह करने के लिए प्रेरित किया।” उनके इस बयान ने समारोह को और भी खास बना दिया।

फ्रांस से आए मेहमान भी दिखे पहाड़ी रंग में रंगे

इस विवाह में फ्रांस से 25 से अधिक मेहमान शामिल हुए। खास बात यह रही कि सभी विदेशी मेहमान पारंपरिक भारतीय परिधानों में नजर आए। महिलाओं ने साड़ी, घाघरा-चोली और कुमाऊंनी पिछौड़ा धारण किया, जबकि पुरुष मेहमान कुर्ता-पायजामा और शेरवानी में सजे दिखे। स्थानीय लोक संगीत, पहाड़ी व्यंजन और पारंपरिक रीति-रिवाजों ने विदेशी मेहमानों को कुमाऊंनी संस्कृति से रूबरू कराया।

दुल्हन के पिता ने साझा की भावुक कहानी

दुल्हन के पिता ध्रुव रंजन जोशी ने बताया “भारत में पढ़ाई करने के बाद हमारी बेटी उच्च शिक्षा के लिए फ्रांस गई थी। पढ़ाई पूरी होने के बाद वह वहीं एक कंपनी में कार्यरत है। एक साल पहले बेटी के साथ काम करने वाले सहयोगी का विवाह प्रस्ताव मेरे पास आया था। पहले तो बेटी को इतनी दूर भेजने से मना किया। फिर फ्रांस जाकर उनके परिवार से मिला तो परिवार अच्छा लगा। इसके बाद दोनों का विवाह करने का निर्णय लिया। आज दोनों का विवाह हो रहा है तो मैं बहुत खुश हूं।”

दो देशों और संस्कृतियों का अनोखा मिलन

यह अंतरराष्ट्रीय विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि भारत और फ्रांस की सांस्कृतिक विरासतों के संगम का प्रतीक बन गया। अल्मोड़ा में आयोजित इस विवाह ने यह साबित कर दिया कि भारतीय परंपराएं और उत्तराखंड की आध्यात्मिकता विश्वभर के लोगों को आकर्षित करने की क्षमता रखती हैं। स्थानीय लोगों में भी इस आयोजन को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। सोशल मीडिया पर इस विवाह की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे अल्मोड़ा और कसार देवी एक बार फिर वैश्विक चर्चा में आ गए हैं।