उत्तराखंड: फोरलेन परियोजना के लिए 3600 पेड़ों पर चलेगी आरी, 13 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित

काशीपुर-रामनगर फोरलेन परियोजना के लिए 3600 पेड़ काटे जाएंगे, जिनमें 3300 वन विभाग और 300 उद्यान विभाग के पेड़ शामिल हैं। वन विभाग उत्तरी जसपुर में पौधारोपण कर भरपाई करेगा। राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण को लेकर संयुक्त निरीक्षण भी पूरा।
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Kashipur-Ramnagar fourlane: Massive Tree Felling Approved for Uttarakhand Four-Lane Road Project
Image: Massive Tree Felling Approved for Uttarakhand Four-Lane Road Project

रामनगर: रामनगर में प्रस्तावित काशीपुर–रामनगर फोरलेन परियोजना के तहत करीब 3600 पेड़ काटे जाएंगे। राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण के लिए की जा रही इस कार्रवाई में 3300 पेड़ वन विभाग के और 300 पेड़ उद्यान विभाग के शामिल हैं। हालांकि वन विभाग ने आश्वासन दिया है कि काटे जाने वाले सभी पेड़ों की भरपाई पौधारोपण के माध्यम से की जाएगी।

Massive Tree Felling Approved for Uttarakhand Four-Lane Road Project

काशीपुर–बुआखाल राष्ट्रीय राजमार्ग के अंतर्गत रामनगर के नया गांव चौहान तक फोरलेन सड़क का निर्माण प्रस्तावित है। चौड़ीकरण के लिए तराई पश्चिमी वन प्रभाग की लगभग 13.48 हेक्टेयर भूमि प्रभावित होगी। वन विभाग के अनुसार काशीपुर से नया गांव चौहान तक कुल 3600 पेड़ सड़क निर्माण की जद में आ रहे हैं। वनाधिकारियों के मुताबिक 3300 पेड़ वन विभाग के अधीन हैं, जिनमें शागौन, शीशम, हल्दू, बांकुली, कुकाट, रोहिणी और जामुन प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 300 पेड़ उद्यान विभाग के हैं, जिनमें आम और लीची के पेड़ शामिल हैं।

संयुक्त निरीक्षण के बाद स्पष्ट हुई स्थिति

पिछले महीने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, प्रशासन, वन विभाग और उद्यान विभाग के अधिकारियों द्वारा संयुक्त निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान चौड़ीकरण की जद में आने वाले पेड़ों की संख्या और स्थिति का आकलन किया गया। इसके बाद संबंधित विभागों ने कटान योग्य पेड़ों की सूची राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को सौंप दी है। पेड़ों की कटाई की जिम्मेदारी वन विभाग के माध्यम से वन निगम को सौंपी जाएगी। पहले पेड़ों का छपान (चिन्हांकन) किया जाएगा, उसके बाद कटान की प्रक्रिया शुरू होगी। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जितने पेड़ काटे जाएंगे, उतने ही पौधे तराई पश्चिमी वन प्रभाग के उत्तरी जसपुर क्षेत्र में लगाए जाएंगे, ताकि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखा जा सके।

विकास बनाम पर्यावरण: उठ रहे सवाल

फोरलेन परियोजना से जहां क्षेत्र में यातायात सुगम होगा और पर्यटन व व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, वहीं हजारों पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरण संरक्षण की चिंता भी सामने आ रही है। स्थानीय स्तर पर विकास और हरित संतुलन के बीच तालमेल बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।