हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल में जीवित मरीज को फाइल में मृत दिखाने के आरोप पर एबीवीपी और छात्रसंघ ने जमकर प्रदर्शन किया। पुलिस मौके पर पहुंची, अस्पताल प्रबंधन ने कर्मचारी को हटाया। पढ़ें पूरी खबर।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Haldwani Private Hospital Declares Living Woman Dead on Paper
हल्द्वानी: हल्द्वानी में एक निजी अस्पताल एक बार फिर गंभीर आरोपों के चलते विवादों में आ गया है। इस बार मामला इतना संवेदनशील है कि छात्र संगठनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। आरोप है कि भर्ती के दौरान एक जीवित मरीज को अस्पताल की फाइल में मृत दर्शा दिया गया, जिससे भारी आक्रोश फैल गया।
Haldwani Private Hospital Declares Living Woman Dead on Paper
जानकारी के अनुसार, अस्पताल में भर्ती एक मरीज को जीवित होने के बावजूद दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया गया। इस कथित लापरवाही की खबर फैलते ही छात्र संगठनों और आम लोगों में नाराजगी बढ़ गई। छात्रों का कहना है कि यह महज कागजी गलती नहीं, बल्कि गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। घटना के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ता और छात्रसंघ पदाधिकारी अस्पताल गेट पर धरने पर बैठ गए।
दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
छात्रसंघ अध्यक्ष अभिषेक गोस्वामी के नेतृत्व में छात्रों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मामले में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित करने की कोशिश की।
मनोज कत्याल (एसपी सिटी) ने बताया कि अस्पताल में प्रदर्शन की सूचना मिलने पर पुलिस बल भेजा गया था। हालांकि, अभी तक इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।
अस्पताल प्रबंधन की सफाई
विवाद बढ़ने के बाद अस्पताल प्रबंधन की ओर से सफाई पेश की गई। प्रबंधन का कहना है कि फाइल में ‘डेथ’ शब्द गलती से दर्ज हो गया था। संबंधित कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से नौकरी से निकाल दिया गया है। हालांकि, छात्र संगठनों का कहना है कि केवल कर्मचारी को हटाना पर्याप्त नहीं है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
पहले भी लग चुके हैं गंभीर आरोप
गौरतलब है कि इससे पहले भी यही अस्पताल एक महिला के शव को परिजनों को सौंपने में कथित अभद्रता को लेकर सुर्खियों में रहा था। उस समय भी पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ था। बार-बार सामने आ रहे ऐसे मामलों से निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।