उत्तराखंड शिक्षा निदेशालय मारपीट: विधायक उमेश शर्मा काऊ ने मांगी सार्वजनिक माफी, जारी रहेंगे मुकदमे

रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ ने शिक्षा निदेशालय में हुई मारपीट की घटना पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और खेद व्यक्त किया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों से दर्ज मुकदमे कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी रहेंगे।
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Ajay Naudiyal Assault Case: MLA Umesh Sharma Kau Apologizes in Education Directorate Incident
Image: MLA Umesh Sharma Kau Apologizes in Education Directorate Incident

देहरादून: देहरादून में प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में हुए मारपीट प्रकरण को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। रायपुर से विधायक Umesh Sharma Kau ने बुधवार को भाजपा महानगर कार्यालय में सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली।

MLA Umesh Sharma Kau Apologizes in Education Directorate Incident

भाजपा महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल और सैकड़ों समर्थकों की मौजूदगी में विधायक ने 21 फरवरी को हुई घटना पर खेद जताते हुए पहले से तैयार किया गया माफीनामा पढ़ा। विधायक काऊ ने कहा कि वे अपने क्षेत्र में एक विद्यालय के नामकरण को लेकर शिक्षा निदेशालय गए थे। उनका कहना था कि संबंधित विद्यालय के लिए 1.5 बीघा जमीन दान करने वाले स्व. पदम सिंह रावत के नाम पर स्कूल का नाम रखने की मांग को लेकर वे अधिकारियों से मिलने पहुंचे थे।

बातचीत के दौरान माहौल तनावपूर्ण

उन्होंने बताया कि यह मामला लंबे समय से लंबित था। बातचीत के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया और विवाद बढ़ गया। उन्होंने कहा कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्होंने स्थिति को शांत करने का प्रयास किया, लेकिन “जाने-अनजाने” में घटना हो गई, जिस पर उन्हें गहरा खेद है। विधायक ने कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों से उन्हें हमेशा सहयोग मिला है और उन्होंने भी सदैव सम्मान दिया है। घटना पर अफसोस जताते हुए उन्होंने संबंधित पक्षों से माफी मांगी।

“नौडियाल मेरे छोटे भाई जैसे”

विधायक काऊ ने कहा कि अजय नौडियाल उनके छोटे भाई समान हैं और उन्हें जो चोट लगी है, वह उन्हें स्वयं लगी है। उन्होंने कर्मचारी-अधिकारी वर्ग को अपना परिवार बताते हुए कहा कि वे किसी का अहित सोच भी नहीं सकते। उन्होंने कर्मचारी अधिकारी शिक्षक संघ मोर्चा का आभार भी व्यक्त किया कि उन्होंने इस घटना का राजनीतिकरण नहीं होने दिया।

मुकदमे वापस नहीं होंगे?

माफीनामा पढ़ने के बाद जब विधायक से पूछा गया कि क्या वे मुकदमा वापस लेने की मांग स्वीकार करेंगे, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि कानूनी प्रक्रिया अपने तरीके से चलेगी। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों की ओर से मुकदमे दर्ज हुए हैं और यदि वापसी होगी तो वह भी दोनों तरफ से होनी चाहिए।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज है। हालांकि विधायक द्वारा सार्वजनिक माफी मांगने से मामला शांत होने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया जारी रहने से प्रकरण पूरी तरह समाप्त होता नहीं दिख रहा।
प्रदेश की राजनीति में यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है और आने वाले दिनों में इसकी आगे की स्थिति पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।