उत्तराखंड में करीब 4000 डिप्लोमा इंजीनियर 27 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इसका असर PWD समेत कई विभागों के कामकाज पर पड़ रहा है।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: 4000 Diploma Engineers on Indefinite Strike in Uttarakhand
देहरादून: उत्तराखंड में डिप्लोमा इंजीनियरों का आंदोलन अब तेज हो गया है। उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के बैनर तले करीब 4 हजार इंजीनियर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। शासन स्तर पर वार्ता विफल होने के बाद इंजीनियरों ने आंदोलन को और तेज कर दिया है।
4000 Diploma Engineers on Indefinite Strike in Uttarakhand
देहरादून स्थित लोक निर्माण विभाग (PWD) मुख्यालय में महासंघ के सदस्य दूसरे दिन भी हड़ताल पर डटे रहे। इस दौरान इंजीनियर मुकेश रतूड़ी ने हड़ताल की अध्यक्षता की, जबकि संचालन सुमित जगूड़ी ने किया।
सरकार को दी चेतावनी
महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष आरसी शर्मा ने साफ कहा कि जब तक मांगों पर शासनादेश जारी नहीं होता, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। महासचिव वीरेंद्र गुसाईं ने बताया कि वर्ष 2013 के बाद नियुक्त अभियंताओं को 10 साल सेवा के बावजूद 5400 ग्रेड पे का लाभ नहीं मिल रहा, जिससे इंजीनियरों में भारी नाराजगी है।
क्या हैं प्रमुख मांगें
इंजीनियरों की 27 सूत्रीय मांगों में कई अहम मुद्दे शामिल हैं, जैसे:
वेतन विसंगति दूर करना
समयबद्ध पदोन्नति
एसीपी/एमएसीपी का लाभ
पुरानी पेंशन बहाली
विभागों का पुनर्गठन
पदोन्नति के अवसर बढ़ाना
तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता
फील्ड स्टाफ की नियुक्ति
विकास कार्यों पर असर
हड़ताल के कारण लोक निर्माण विभाग समेत कई अभियांत्रिक विभागों के कामकाज पर असर साफ दिखाई दे रहा है। सड़कों और अन्य निर्माण कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ गई है और कई परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
आवश्यक सेवाएं भी हो सकती हैं प्रभावित
इंजीनियरों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आवश्यक सेवाएं भी बाधित की जा सकती हैं। इससे आम जनता को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। महासंघ से जुड़े इंजीनियरों का कहना है कि सरकार लंबे समय से उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर सरकार और महासंघ के बीच होने वाली अगली वार्ता पर टिकी है। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
इंजीनियरों की यह हड़ताल उत्तराखंड के विकास कार्यों पर बड़ा असर डाल सकती है। ऐसे में सरकार और महासंघ के बीच जल्द समाधान निकालना बेहद जरूरी हो गया है।