उत्तराखंड: इस दिन खुलेंगे तुंगनाथ बाबा और मद्महेश्वर महादेव के कपाट, बैशाखी पर तय की गई तिथि

Baisakhi के अवसर पर Omkareshwar Temple Ukhimath में पूजा-अर्चना के बाद Madhyamaheshwar Temple और Tungnath Temple के कपाट खुलने की तिथियां घोषित की गईं।
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Tungnath temple opening date: Tungnath and Madhyamaheshwar Temples Opening Date
Image: Tungnath and Madhyamaheshwar Temples Opening Date

रुद्रप्रयाग: देवभूमि उत्तराखंड में स्थित सबसे ऊंचे शिव मंदिर तुंगनाथ के साथ ही द्वितीय केदार बाबा मद्महेश्वर महादेव के भी कपाट खुलने की तिथि Baisakhi के पावन अवसर पर घोषित की जा चुकी है। अब जल्द ही भक्तों के द्वितीय और तृतीय केदार के कपाट को दिए जाएँगे।

Tungnath and Madhyamaheshwar Temples Opening Date

देवभूमि उत्तराखंड में Baisakhi के पावन अवसर पर Omkareshwar Temple Ukhimath में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर और तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथियां तय की गईं। तय तिथि के अनुसार Tungnath Temple के कपाट 22 अप्रैल को खोले जाएंगे, जबकि Madhyamaheshwar Temple के कपाट 21 मई को विधिवत पूजा-अर्चना के बाद भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिए जाएंगे। इस मौके पर तीर्थ पुरोहितों और मंदिर समिति के पुजारियों ने पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न की। कपाट खुलने की तिथि तय करने के दौरान कई तीर्थ पुरोहित, मंदिर समिति के सदस्य और स्थानीय गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने मिलकर विधिवत पूजा-अर्चना की और धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए तिथियों की घोषणा की। आगे पढ़िए..

तुंगनाथ डोली यात्रा का कार्यक्रम

भगवान Tungnath Temple की चल विग्रह उत्सव डोली 20 अप्रैल को शीतकालीन गद्दी स्थल मक्कूमठ से विधिवत रवाना होगी। यात्रा के दौरान प्रथम रात्रि प्रवास भूतनाथ मंदिर में किया जाएगा, जहां स्थानीय श्रद्धालु नए अन्न का भोग अर्पित करेंगे और पारंपरिक पुणखी मेले का भव्य आयोजन होगा। इसके बाद 21 अप्रैल को डोली विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए चोपता पहुंचेगी। अगले दिन यानी 22 अप्रैल को चोपता से प्रस्थान कर यह डोली हरे-भरे बुग्यालों के बीच स्थित तुंगनाथ धाम पहुंचेगी, जहां विधि-विधान के साथ मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।

मदमहेश्वर डोली यात्रा और कपाट खुलने की तिथि

वहीं Madhyamaheshwar Temple के कपाट 21 मई को कर्क लग्न के शुभ मुहूर्त में खोले जाएंगे। इस धार्मिक प्रक्रिया की शुरुआत 17 मई से होगी, जब ओंकारेश्वर मंदिर में चल विग्रह मूर्तियों को गर्भगृह से निकालकर सभा मंडप में स्थापित किया जाएगा। 18 मई को श्रद्धालुओं को डोली के दर्शन कराए जाएंगे, जबकि 19 मई को डोली ओंकारेश्वर मंदिर से कैलाश के लिए प्रस्थान करेगी। यह डोली यात्रा डगवाड़ी, ब्राह्मणखोली, मंगोलचारी, मनसूना, राऊलैंक और उनियाणा जैसे प्रमुख पड़ावों से गुजरते हुए श्रद्धालुओं को दर्शन देती हुई रात्रि विश्राम के लिए राकेश्वरी मंदिर, रासी पहुंचेगी।