दिल्ली-NCR से उत्तराखंड पहुंची श्रमिक आंदोलन की आग, धरने पर बैठे कर्मचारी; सैलरी बढ़ाओ तभी होगा काम

दिल्ली-एनसीआर में चल रहे मजदूर प्रदर्शनों के बीच पंतनगर में भी श्रमिकों ने सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर काम ठप कर दिया। सुबह-सुबह कर्मचारी दफ्तरों के बाहर इकट्ठा होकर जोरदार नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन करने लगे।
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Pantnagar workers strike: Workers Strike in Pantnagar
Image: Workers Strike in Pantnagar

उधमसिंह नगर: उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के पंतनगर औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों ने वेतन वृद्धि की मांग को लेकर अचानक हड़ताल शुरू कर दी। सुबह-सुबह ही बड़ी संख्या में कर्मचारी काम छोड़कर दफ्तरों और फैक्ट्री गेट के बाहर एकत्रित हो गए और नारेबाजी करने लगे। इससे पूरे औद्योगिक क्षेत्र में हलचल मच गई।

Workers Strike in Pantnagar for Demanding Salary Hike

सेक्टर-9 स्थित Belrise Industries Limited समेत कई अन्य कंपनियों के श्रमिक गुस्से में मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने “सैलरी बढ़ाओ, तभी काम पर जाएंगे” जैसे नारे लगाए और प्रबंधन के खिलाफ अपना विरोध जताया। सुबह की शिफ्ट शुरू होते ही बड़ी संख्या में कर्मचारी काम छोड़कर बाहर आ गए, जिससे उत्पादन कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गया। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी खुलकर सामने आने लगी। आगे पढ़िए..

महंगाई के बीच वेतन न बढ़ने से नाराजगी

श्रमिकों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के बावजूद उनकी सैलरी में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। उन्होंने कई बार प्रबंधन से वेतन बढ़ाने की मांग की, लेकिन उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया गया। इसी वजह से मजबूर होकर उन्हें हड़ताल का सहारा लेना पड़ा।

मांग पूरी होने तक नहीं लौटेंगे काम पर

प्रदर्शन कर रहे मजदूरों ने साफ तौर पर कहा है कि जब तक वेतन वृद्धि को लेकर ठोस आश्वासन नहीं दिया जाता, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। इससे आने वाले दिनों में औद्योगिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। श्रमिकों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कंपनी प्रबंधन और पुलिस द्वारा उनके साथ धक्का-मुक्की की गई। हालांकि इस मामले में अभी तक आधिकारिक रूप से कोई बयान सामने नहीं आया है।
पंतनगर में मजदूरों की यह हड़ताल उद्योगों के लिए चिंता का विषय बन गई है। यदि जल्द ही समाधान नहीं निकला, तो इसका असर उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। अब सबकी नजर प्रबंधन और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है।