गढ़वाल में घास काट रही महिला पर झपटे दो गुलदार, एक ने गर्दन दबोची; दूसरा जंगल में घसीटकर ले गया

Uttarakhand News: उत्तराखंड के पौड़ी में दो गुलदारों ने खेत में काम कर रही बुजुर्ग महिला पर हमला कर उसे मार डाला। पढ़ें पूरी खबर।
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Uttarakhand leopard attack: Elderly woman dies after being attacked by leopard
Image: Elderly woman dies after being attacked by leopard

पौड़ी गढ़वाल: उत्तराखंड में वन्यजीवों के हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, प्रदेश में वन्यजीव हमलों में इस साल अब तक 23 लोगों की मौत हो चुकी है। ताजा खबर: बुधवार को पौड़ी जिले में दो गुलदारों ने हमला कर एक बुजुर्ग महिला की जान ले ली। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।

Elderly woman dies after being attacked by leopard

जानकारी के अनुसार पौड़ी गढ़वाल जिले के ग्राम पंचायत बुढ़ाकोट के बमठी गांव की 70 वर्षीय सीता देवी खंडूड़ी बुधवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे अपने घर के पास खेत में घास काट रही थीं। तभी अचानक एक गुलदार ने उन पर हमला कर दिया। महिला ने दराती से खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन तभी दूसरा गुलदार भी वहां आ पहुंचा और हमला और भी भयावह हो गया। हमले के दौरान दोनों गुलदार महिला को घसीटते हुए झाड़ियों की ओर ले गए। महिला के शोर मचाने पर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और हल्ला मचाया। ग्रामीणों के शोर से गुलदार जंगल की ओर भाग गए, लेकिन तब तक महिला की मौत हो चुकी थी। आगे पढ़िए..

ग्रामीणों में आक्रोश, अधिकारियों का घेराव

घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। मौके पर पहुंचे संयुक्त मजिस्ट्रेट और प्रभारी डीएफओ गढ़वाल का ग्रामीणों ने घेराव कर विरोध जताया। लोगों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की। इस घटना की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने संबंधित गुलदार को आदमखोर घोषित कर दिया है। साथ ही मौके पर 20 सदस्यीय वन कर्मियों की टीम तैनात की गई है। इसके अलावा मशहूर शिकारी जाय हुकिल को भी बुलाया गया है, जो गुलदार को पकड़ने या मारने के अभियान में जुटेंगे।

इस वर्ष 23 लोगों की हो चुकी है मौत

प्रदेश में वन्यजीव हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। इस वर्ष अब तक 23 लोगों की जान ऐसे हमलों में जा चुकी है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है। लगातार हो रही घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष बढ़ता जा रहा है। ऐसे में समय रहते ठोस और प्रभावी कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।