Uttarakhand news: उत्तराखंड में गैस एजेंसी के मैनेजर ने काटा अपना हाथ, सिलिंडर डिलिवरी का था दबाव

Uttarakhand news: उत्तराखंड के श्रीनगर गढ़वाल में LPG गैस सिलेंडर की भारी कमी के चलते अफरा-तफरी मच गई। भीड़ और तनाव के बीच गैस एजेंसी मैनेजर ने खुद को घायल कर लिया। पढ़ें पूरी खबर।
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Srinagar Garhwal gas crisis: LPG Shortage Chaos in Srinagar Garhwal
Image: LPG Shortage Chaos in Srinagar Garhwal

श्रीनगर गढ़वाल: उत्तराखंड के श्रीनगर गढ़वाल में LPG गैस सिलेंडरों की भारी कमी के चलते हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं। लंबे समय से गैस की आपूर्ति बाधित होने के कारण लोगों में भारी नाराजगी और बेचैनी देखी जा रही है।

LPG Shortage Chaos in Srinagar Garhwal

स्थानीय लोगों के अनुसार, गैस सिलेंडर पाने के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में जैसे ही सिलेंडर से भरा ट्रक गोदाम पहुंचता है, लोग बड़ी संख्या में वहां इकट्ठा हो जाते हैं। गुरुवार सुबह भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब सिलेंडर लेकर ट्रक पहुंचते ही लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी। देखते ही देखते भीड़ इतनी बढ़ गई कि वहां अफरातफरी का माहौल बन गया।

ग्राहकों और कर्मचारियों के बीच कहासुनी

सिलेंडरों की सीमित संख्या और बढ़ती भीड़ के कारण ग्राहकों और गैस एजेंसी कर्मचारियों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। धीरे-धीरे यह कहासुनी बढ़कर तनावपूर्ण स्थिति में बदल गई, जिससे माहौल और अधिक बिगड़ गया। इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच गैस एजेंसी के मैनेजर दीपक कुमार पटेल ने मानसिक दबाव में आकर कांच से अपना हाथ काट लिया। यह घटना अचानक हुई, जिससे मौके पर मौजूद लोग स्तब्ध रह गए और तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने मैनेजर का तुरंत इलाज शुरू किया। डॉक्टरों के अनुसार चोट गंभीर नहीं है और राहत की बात यह है कि नस नहीं कटी है। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और वह खतरे से बाहर हैं। आगे पढ़िए..

पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं

गौरतलब है कि यह पहली घटना नहीं है। इसी महीने की शुरुआत में चंपावत में एक इंडेन गैस एजेंसी के मैनेजर ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी। इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ते तनाव और अव्यवस्था की ओर इशारा करती हैं।
इस घटना के बाद गैस आपूर्ति व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि समय पर सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने से समस्या और बढ़ रही है। साथ ही भीड़ को नियंत्रित करने के लिए भी पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं।