Uttarakhand News: अल्मोड़ा उपभोक्ता आयोग ने खराब फ्रिज सप्लाई करने पर रुद्रपुर की फर्म को 1.80 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया। जानिए पूरा मामला और कोर्ट का फैसला।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Consumer Court Orders Refund in Defective Fridge Case
अल्मोड़ा: अल्मोड़ा जिले के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में रुद्रपुर की एक फर्म को उपभोक्ता के साथ धोखाधड़ी और सेवा में कमी का दोषी ठहराया है। आयोग ने फर्म को उपभोक्ता को कुल 1.80 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया है।
Consumer Court Orders ₹1.80 Lakh Refund in Defective Fridge Case
द्वाराहाट क्षेत्र के रावलसेरा निवासी श्याम सिंह ने अपने डेयरी व्यवसाय के लिए रुद्रपुर स्थित एमएस सिद्धार्थ रेफ्रिजरेशन फर्म से डिस्प्ले काउंटर फ्रिज खरीदने के लिए 1.50 लाख रुपये का भुगतान किया था। इसमें 50 हजार रुपये एडवांस ऑनलाइन दिए गए थे, जबकि शेष राशि बैंक ऋण के माध्यम से सीधे फर्म के खाते में ट्रांसफर की गई।
खराब उत्पाद और बढ़ती परेशानी
परिवादी का आरोप है कि फर्म द्वारा सप्लाई किया गया फ्रिज खराब था। कई बार शिकायत करने के बावजूद फर्म ने न तो फ्रिज को ठीक किया और न ही कोई संतोषजनक समाधान दिया। इसके चलते उनका डेयरी व्यवसाय प्रभावित हुआ और वे बैंक ऋण की किस्तें चुकाने में भी असमर्थ हो गए। साथ ही फर्म पर फर्जी कोटेशन और बिल देने के आरोप भी लगे। इस मामले में फर्म को नोटिस जारी किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद आयोग ने एकपक्षीय सुनवाई करते हुए मामले का निपटारा किया। आगे पढ़िए..
आयोग का सख्त फैसला
आयोग ने अपने निर्णय में कहा कि फर्म द्वारा सेवा में स्पष्ट कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार अपनाया गया है। इसलिए फर्म को निर्देश दिया गया कि वह 45 दिनों के भीतर:-
1.50 लाख रुपये (मूल राशि)
20 हजार रुपये (मानसिक क्षतिपूर्ति)
10 हजार रुपये (वाद व्यय)
कुल 1.80 लाख रुपये का भुगतान करे।
समय सीमा और अतिरिक्त प्रावधान
आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया गया, तो फर्म को 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। साथ ही आदेश का पालन न करने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा
आयोग के अध्यक्ष रमेश कुमार जायसवाल और सदस्य विद्या बिष्ट व सुरेश चंद्र कांडपाल की पीठ द्वारा सुनाया यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट संदेश जाता है कि यदि कोई कंपनी खराब उत्पाद बेचती है या सेवा में लापरवाही करती है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।