Uttarakhand: 1 सेकेंड ने डुबो दी 1.65 करोड़ की कार! कोर्ट ने Land Rover को दिया बड़ा झटका

उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता आयोग ने Jaguar Land Rover को 1.65 करोड़ रुपये (7% ब्याज सहित) लौटाने का आदेश दिया है। कारण—कार की स्पीड का दावा गलत निकला, साथ ही फ्यूल टैंक और चेसिस से जुड़ी गंभीर खामियां भी सामने आईं।
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Land Rover Defender case: Land Rover Ordered to Refund Crore Over False Speed Claim
Image: Land Rover Ordered to Refund Crore Over False Speed Claim

हरिद्वार: लग्जरी कार निर्माता Jaguar Land Rover को उत्तराखंड में बड़ा झटका लगा है। कंपनी की महंगी SUV Land Rover Defender अपने ही विज्ञापन में किए गए स्पीड दावे पर खरी नहीं उतरी। इस मामले में उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को ग्राहक को 1.65 करोड़ रुपये ब्याज सहित वापस करने का आदेश दिया है। यह मामला दिखाता है कि छोटी सी तकनीकी कमी भी बड़ी कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकती है।

Land Rover Ordered to Refund ₹1.65 Crore Over False Speed Claim

राज्य उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले में साफ कहा कि महंगी कार बेचने का मतलब यह नहीं कि कंपनी अपनी जिम्मेदारियों से बच सकती है। आयोग की पीठ, जिसकी अध्यक्षता कुमकुम रानी ने की और जिसमें बी.एस. मनराल सदस्य थे, ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ग्राहक के पक्ष में निर्णय सुनाया। कार खरीदते समय कंपनी ने दावा किया था कि यह SUV 6.1 सेकेंड में 0 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ सकती है। लेकिन जब ग्राहक ने इसे टेस्ट किया तो कार को इस स्पीड तक पहुंचने में 7.1 सेकंड से भी अधिक समय लगा। यानी कंपनी का दावा वास्तविक प्रदर्शन से लगभग एक सेकेंड पीछे\ साबित हुआ, जो इस मामले की मुख्य वजह बना।

कंपनी की सफाई और आयोग का जवाब

कंपनी की ओर से तर्क दिया गया कि यह स्पीड केवल आदर्श टेस्टिंग परिस्थितियों में हासिल की जा सकती है। लेकिन आयोग ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि यदि यह जानकारी ग्राहक को पहले नहीं दी गई, तो यह भ्रामक विज्ञापन की श्रेणी में आता है और उपभोक्ता के साथ धोखा है। ग्राहक ने यह भी शिकायत की कि कार का फ्यूल टैंक ढक्कन सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम के साथ काम नहीं करता था। जबकि इस तरह की सुविधा इस श्रेणी की कार में अपेक्षित होती है। आयोग ने इसे स्पष्ट रूप से मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट माना और इसे फैसले का महत्वपूर्ण आधार बनाया। आगे पढ़िए..

चेसिस में छेड़छाड़ का गंभीर आरोप

मामले में एक और गंभीर मुद्दा सामने आया जब ग्राहक ने बताया कि कार के नीचे से अजीब आवाजें आ रही थीं। जब इसे डीलर के पास ले जाया गया तो बिना अनुमति के चेसिस में कटिंग और वेल्डिंग कर दी गई। आयोग ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि चेसिस वाहन की रीढ़ होती है और इसमें किसी भी तरह की छेड़छाड़ से गाड़ी की मूल गुणवत्ता प्रभावित होती है। कंपनी ने यह कहकर बचने की कोशिश की कि चेसिस में बदलाव डीलर द्वारा किया गया था, इसलिए जिम्मेदारी उसकी है। लेकिन आयोग ने इस तर्क को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि अंतिम जिम्मेदारी Jaguar Land Rover India Limited की ही होगी, क्योंकि उत्पाद और उसकी गुणवत्ता के लिए कंपनी जवाबदेह है।
आयोग ने अपने फैसले में कंपनी को निर्देश दिया कि वह ग्राहक को 1.65 करोड़ रुपये की पूरी राशि 7 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाए। इसके अलावा, कंपनी को ग्राहक के मुकदमे का 50 हजार रुपये खर्च भी देना होगा। यह लग्जरी SUV 27 मार्च 2024 को मैसर्स इप्रो ग्लोबल लिमिटेड द्वारा खरीदी गई थी। खरीद के बाद सामने आई खामियों और दावे में अंतर के चलते यह मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा।