देहरादून में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए सरकार ने अंडरग्राउंड पार्किंग परियोजना की तैयारी शुरू कर दी है। परेड ग्राउंड और गांधी पार्क के बीच 390 वाहनों की क्षमता वाली पार्किंग बनाई जाएगी।
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Image: Dehradun Plans Massive Underground Parking Projects
देहरादून: Dehradun में लगातार बढ़ रहे ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ी पहल शुरू की है। राजधानी के प्रमुख इलाकों में अंडरग्राउंड पार्किंग बनाने की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है।
Dehradun Plans Massive Underground Parking Projects
सचिवालय में आयोजित बैठक में परेड ग्राउंड और गांधी पार्क के बीच प्रस्तावित अंडरग्राउंड पार्किंग परियोजना का प्रस्तुतीकरण किया गया। लोक निर्माण विभाग के अनुसार लगभग 6500 वर्ग मीटर क्षेत्र में जी-1 स्तर की पार्किंग बनाई जाएगी। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 60 करोड़ रुपये बताई गई है और इसमें लगभग 390 वाहनों को पार्क करने की क्षमता होगी।
इन इलाकों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
परियोजना पूरी होने के बाद राजपुर रोड, ऐस्ले हाल, सुभाष रोड और लैंसडाउन चौक जैसे व्यस्त इलाकों में सड़क किनारे खड़े वाहनों की समस्या कम हो सकती है। इससे ट्रैफिक जाम में राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
बैठक में सचिव आवास R Rajesh Kumar ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रस्तावित स्थल का मौके पर निरीक्षण किया जाए। इसके बाद परियोजना को अंतिम रूप देने के लिए विस्तृत बैठक आयोजित की जाएगी।
दूसरी पार्किंग परियोजना पर भी चर्चा
बैठक में सचिवालय के राजपुर रोड छोर पर प्रस्तावित दूसरी अंडरग्राउंड पार्किंग योजना का भी प्रस्तुतीकरण किया गया। इस परियोजना की अनुमानित लागत 68 करोड़ रुपये रखी गई है, जिसमें 189 वाहनों की पार्किंग क्षमता प्रस्तावित है। हालांकि प्रति वाहन करीब 35 लाख रुपये खर्च होने पर सचिव आवास ने आपत्ति जताई और योजना की दोबारा समीक्षा के निर्देश दिए।
आम जनता या सिर्फ सचिवालय कर्मियों के लिए?
अधिकारियों से यह स्पष्ट करने को कहा गया कि यह पार्किंग केवल सचिवालय कर्मचारियों के लिए होगी या आम जनता भी इसका उपयोग कर सकेगी। विभाग को संशोधित प्रस्ताव के साथ अगली बैठक में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि देहरादून में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए ऐसी परियोजनाएं जरूरी हो गई हैं। सभी संबंधित विभागों के सहयोग से इसे एक मॉडल प्रोजेक्ट के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि विकास और पर्यावरण दोनों के बीच संतुलन बना रहे।