IMA Passing Out Parade 2026 में पिथौरागढ़ के भूपेंद्र सिंह सोन भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने। कंधों पर सितारे सजते ही परिवार भावुक हो उठा। पढ़ें सफलता की प्रेरणादायक कहानी।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Bhupendra Singh from Pithoragarh becomes a Lieutenant in Indian Army
पिथौरागढ़: भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) देहरादून की 158वीं पासिंग आउट परेड (POP) के बाद देश को 481 नए सैन्य अधिकारी मिले हैं। इनमें उत्तराखंड के कई युवा भी शामिल हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन के दम पर भारतीय सेना में अधिकारी बनने का सपना साकार किया। इन्हीं में से एक नाम है पिथौरागढ़ के लेफ्टिनेंट भूपेंद्र सिंह सोन का, जिन्होंने IMA से सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त किया।
Bhupendra Singh from Pithoragarh becomes a Lieutenant in Indian Army
पासिंग आउट परेड के बाद बातचीत में लेफ्टिनेंट भूपेंद्र सिंह सोन ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह दिन उनके जीवन का सबसे गौरवपूर्ण क्षण है। उन्होंने बताया कि सेना में अधिकारी बनने का सपना उन्होंने वर्षों पहले देखा था और इसे पूरा करने के लिए लगातार कठिन परिश्रम किया। उन्होंने कहा, "आज मैं भारतीय सेना में कमीशन होकर बेहद गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। इस दिन के लिए मैंने लंबा इंतजार किया है। IMA तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था, लेकिन आज मेरी मेहनत का फल मुझे मिल गया है।"
युवाओं को दिया सफलता का मंत्र
उत्तराखंड को देश में "फौज की खान" कहा जाता है। यहां के हजारों युवा सेना में सेवा देकर देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में प्रदेश के युवाओं को संदेश देते हुए लेफ्टिनेंट भूपेंद्र सिंह सोन ने कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि युवाओं को कभी भी कठिनाइयों से घबराना नहीं चाहिए। सफलता का रास्ता आसान नहीं होता, लेकिन जो लोग लगातार अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहते हैं, उन्हें एक दिन मंजिल जरूर मिलती है। उन्होंने कहा, "युवाओं को अपने कर्तव्य पथ पर लगातार आगे बढ़ते रहना चाहिए। हार्डवर्क और समर्पण ही सफलता की असली कुंजी है।" आगे पढ़िए..
बेटे के कंधों पर सितारे देख भावुक हुए पिता
लेफ्टिनेंट भूपेंद्र सिंह सोन के पिता मनोज सिंह सोन ने इस अवसर को अपने जीवन का सबसे बड़ा सपना पूरा होने जैसा बताया। उन्होंने कहा कि आज उनके बेटे के कंधों पर चमकते सितारे देखकर गर्व और खुशी दोनों महसूस हो रही है। उन्होंने बताया कि भूपेंद्र बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहे हैं। उनकी शुरुआती शिक्षा पिथौरागढ़ में हुई, जिसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली चले गए। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से बीएससी मैथमैटिक्स की पढ़ाई पूरी की और फिर सेना में अधिकारी बनने के अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़े।
मां ने बताया बेटे की सफलता का राज
इस भावुक मौके पर भूपेंद्र सिंह सोन की माता मंजू देवी की आंखों में भी खुशी के आंसू नजर आए। उन्होंने कहा कि भूपेंद्र बचपन से ही हर काम को गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ करते थे। उन्होंने कहा, "वह जो भी काम करता था, पूरी लगन और ईमानदारी से करता था। शायद यही उसकी सफलता का सबसे बड़ा कारण है।"
लेफ्टिनेंट भूपेंद्र सिंह सोन के परिवार का सेना से पुराना नाता रहा है। उनके दादा पूरण सिंह भी भारतीय सेना से सेवानिवृत्त सैनिक हैं। अपने नाती की उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि भूपेंद्र ने परिवार की सैन्य परंपरा और विरासत को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि नाती को आगे बढ़ाने और उसके सपनों को पूरा करने के लिए परिवार ने हर संभव प्रयास किया और आज उसकी सफलता ने पूरे परिवार को गौरवान्वित कर दिया है।