हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में महिला श्रद्धालुओं को स्पर्श करने पर पुजारियों के लिए रोक लगा दी गई है। नियम तोड़ने पर तत्काल कार्रवाई होगी। मंदिर में चढ़ाए गए नारियल और प्रसाद की दोबारा बिक्री पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Mansa Devi Temple Introduces New Rules for Devotee Safety
हरिद्वार: उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ मनसा देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर बड़ा निर्णय लिया गया है। मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब कोई भी पुजारी महिला श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देने या किसी अन्य बहाने से स्पर्श नहीं करेगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले पुजारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
Mansa Devi Temple Introduces New Rules for Devotee Safety
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने इस संबंध में सभी पुजारियों और मंदिर कर्मचारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर की गरिमा और श्रद्धालुओं की आस्था की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। देश के विभिन्न मंदिरों में समय-समय पर पुजारियों द्वारा महिला श्रद्धालुओं को स्पर्श करने की शिकायतें सामने आती रही हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए मनसा देवी मंदिर में स्पष्ट व्यवस्था लागू की गई है। उन्होंने कहा कि मंदिर में आने वाली प्रत्येक महिला श्रद्धालु को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिलना चाहिए। यदि किसी पुजारी के खिलाफ महिला श्रद्धालु को स्पर्श करने की शिकायत प्राप्त होती है तो उसे तत्काल मंदिर सेवा से हटाया जाएगा।
अब केवल तिलक, नहीं होगा स्पर्श
मंदिर प्रशासन के अनुसार, दर्शन के दौरान पुजारी श्रद्धालुओं से प्रसाद लेकर मां भगवती को अर्पित करेंगे और उसे वापस लौटा देंगे। आशीर्वाद देने के दौरान किसी भी प्रकार का शारीरिक स्पर्श नहीं किया जाएगा।
श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था मां मनसा देवी में है, न कि किसी व्यक्ति विशेष में। इसलिए धार्मिक परंपराओं का पालन मर्यादित और सम्मानजनक तरीके से किया जाएगा। श्रद्धालुओं को केवल तिलक लगाकर आशीर्वाद दिया जाएगा।
चढ़ाए गए नारियल और फूलों की दोबारा बिक्री पर रोक
मंदिर प्रशासन ने प्रसाद और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। अब मंदिर में चढ़ाए गए नारियल, फूल और अन्य प्रसाद को दोबारा बेचने या पुनः चढ़ाने की अनुमति नहीं होगी। श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने बताया कि प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु मंदिर में नारियल और अन्य प्रसाद अर्पित करते हैं। कई बार इन्हें दोबारा बाजार में बेच दिया जाता है और वही प्रसाद फिर मंदिर में चढ़ाया जाता है, जो आस्था और धार्मिक भावनाओं के विपरीत है।
नारियलों का होगा रिसाइकिल, बनी विशेष समिति
मंदिर ट्रस्ट ने नारियलों के बेहतर प्रबंधन के लिए विशेष समिति का गठन किया है। समिति यह सुनिश्चित करेगी कि मंदिर में चढ़ाए गए नारियलों का उचित उपयोग और रिसाइक्लिंग की जाए। प्रशासन का कहना है कि इस कदम से न केवल प्रसाद के दुरुपयोग पर रोक लगेगी, बल्कि मंदिर परिसर में पारदर्शिता और श्रद्धालुओं का विश्वास भी मजबूत होगा।
धार्मिक मर्यादाओं के पालन के लिए सख्त निगरानी
मंदिर प्रशासन ने साफ किया है कि श्रद्धालुओं की किसी भी शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा। मंदिर परिसर में धार्मिक मर्यादाओं, सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि मनसा देवी मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और यहां आने वाले हर भक्त को सम्मान, सुरक्षा और आध्यात्मिक वातावरण उपलब्ध कराना मंदिर प्रशासन की जिम्मेदारी है। मंदिर प्रशासन के इस फैसले को महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा और धार्मिक स्थलों में पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही प्रसाद और नारियलों की पुनर्बिक्री पर रोक लगाने से मंदिर व्यवस्थाओं में सुधार और श्रद्धालुओं का भरोसा बढ़ने की उम्मीद है।