Uttarakhand SC-ST Scholarship Scam में ED ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 13.83 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं। जांच में 2,895 फर्जी छात्रवृत्ति दावे और करोड़ों रुपये के कथित घोटाले का खुलासा हुआ है।
-
राज्य समीक्षा डेस्क
-
Advertisement
Secret Himalayan Treks Near Kedarnath You’ve Never Heard Of
Trails once used by sages, locals, and shepherds. Ideal for travelers seeking silence over social media fame.
Example Ads Media
Image: ED Attaches 13 Crore Assets in Uttarakhand Scholarship Scam
देहरादून: उत्तराखंड के बहुचर्चित एससी-एसटी छात्रवृत्ति घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 13.83 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच (Provisional Attachment) कर लिया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत ईडी के देहरादून सब-ज़ोनल कार्यालय द्वारा की गई है। ईडी की यह कार्रवाई उन आरोपों के आधार पर की गई है जिनमें अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों के लिए चलाई जा रही पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा और धन के दुरुपयोग की बात सामने आई थी।
ED Attaches ₹13.83 Crore Assets in Uttarakhand Scholarship Scam
उत्तराखंड में एससी-एसटी छात्रवृत्ति घोटाले की जांच वर्ष 2020 से जारी है। ईडी अब तक इस मामले में पांच अभियोजन शिकायतें (Prosecution Complaints) विशेष PMLA कोर्ट, देहरादून में दाखिल कर चुकी है। इसके अलावा पांच प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) भी जारी किए जा चुके हैं। मामला उस समय सामने आया था जब उत्तराखंड पुलिस ने वर्ष 2011-12 से 2016-17 के बीच अनुसूचित जाति एवं जनजाति के छात्रों के लिए संचालित पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में कथित अनियमितताओं और सरकारी धन के गबन को लेकर मुकदमा दर्ज किया था।
ईडी की जांच में कई निजी शिक्षण संस्थानों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। जांच एजेंसी के अनुसार कुछ संस्थानों ने फर्जी और अयोग्य छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभार्थी दिखाकर सरकारी धन प्राप्त किया। जांच के दौरान छात्रवृत्ति के कुल 6,208 दावों की पड़ताल की गई, जिनमें से 2,895 दावे फर्जी पाए गए। यह खुलासा इस घोटाले की गंभीरता को दर्शाता है।
अनुपस्थित छात्रों के नाम पर बांटे गए करोड़ों रुपये
ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि 668 ऐसे छात्रों के नाम पर 3.85 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित दिखाई गई, जो वास्तव में अनुपस्थित थे। इसके अलावा 84 ऐसे छात्रों को 33.65 लाख रुपये की छात्रवृत्ति देने का रिकॉर्ड मिला, जिन्होंने परीक्षा नहीं दी थी, परिणाम घोषित नहीं हुआ था या परीक्षा फॉर्म तक जमा नहीं किया था।
विश्वविद्यालय में पंजीकरण ही नहीं, फिर भी मिली छात्रवृत्ति
जांच रिपोर्ट के अनुसार 1,662 ऐसे छात्रों को 7.34 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित दिखाई गई, जिनका विश्वविद्यालय में वैध पंजीकरण ही नहीं था। इसके अतिरिक्त 47 ऐसे छात्रों को भी लगभग 29.75 लाख रुपये की छात्रवृत्ति देने का रिकॉर्ड मिला जो गैर-संबद्ध (Non-Affiliated) पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत बताए गए थे। वहीं 434 मामलों में ऐसे छात्रों के नाम पर करीब 2 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई, जिनका रिकॉर्ड कॉलेजों में उपलब्ध नहीं था या वे डुप्लिकेट पाए गए।
बैंक खातों के जरिए किया गया कथित फर्जीवाड़ा
ईडी के अनुसार जांच में यह भी पता चला कि कई मामलों में छात्रों के नाम पर बैंक खाते खोले गए और उनका संचालन कॉलेज प्रबंधन तथा कर्मचारियों के नियंत्रण में किया गया। कई खातों को खोलने के लिए एक ही मोबाइल नंबर का उपयोग किया गया। आरोप है कि छात्रवृत्ति की राशि इन खातों में जमा होने के बाद वापस संस्थानों तक पहुंचा दी जाती थी या नकद निकाल ली जाती थी। जांच एजेंसी का मानना है कि इस तरह सरकारी कल्याणकारी योजना का उद्देश्य पूरी तरह प्रभावित हुआ और वास्तविक जरूरतमंद छात्रों तक लाभ नहीं पहुंच पाया।
सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता पर बड़ा सवाल
यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं बल्कि सामाजिक न्याय से जुड़ी एक महत्वपूर्ण योजना के दुरुपयोग का भी है। जिन छात्रों के लिए यह योजना बनाई गई थी, उन्हें लाभ पहुंचाने के बजाय कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और बैंक खातों के माध्यम से सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। ईडी की कार्रवाई को छात्रवृत्ति घोटाले के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच के दायरे में और लोगों तथा संस्थानों के आने की संभावना जताई जा रही है।