उत्तराखंड: MBBS डॉक्टरों पर नई नीति! अब 3 साल सरकारी सेवा के बाद ही कर सकेंगे PG, कैबिनेट में आएगा प्रस्ताव

उत्तराखंड सरकार राजकीय मेडिकल कॉलेजों से MBBS करने वाले डॉक्टरों के लिए नई नीति लाने की तैयारी में है। प्रस्ताव के अनुसार अब तीन साल सरकारी सेवा पूरी करने के बाद ही PG में प्रवेश के लिए आवेदन की अनुमति मिलेगी।
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देहरादून: उत्तराखंड में सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग बड़ा कदम उठाने जा रहा है। विभाग ने ऐसी नई नीति तैयार की है, जिसके तहत राजकीय मेडिकल कॉलेजों से MBBS करने वाले डॉक्टरों को पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) के लिए आवेदन करने से पहले कम से कम तीन वर्ष तक सरकारी सेवा देना अनिवार्य हो सकता है। प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है और इसे जल्द कैबिनेट के समक्ष रखा जा सकता है।

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प्रदेश में लंबे समय से विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। वर्तमान व्यवस्था में कई MBBS डॉक्टर सरकारी सेवा जॉइन करने के कुछ समय बाद ही PG में प्रवेश के लिए आवेदन कर देते हैं। इसके कारण अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता प्रभावित होती है और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ता है। इसी समस्या के समाधान के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नई नीति का मसौदा तैयार किया है।

तीन साल सेवा के बाद ही मिलेगा PG का मौका

प्रस्ताव के अनुसार, राजकीय मेडिकल कॉलेजों से MBBS करने वाले डॉक्टरों को स्वास्थ्य विभाग में नियुक्ति के बाद कम से कम तीन साल तक सरकारी सेवा देनी होगी। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद ही उन्हें पोस्ट ग्रेजुएशन करने की अनुमति दी जाएगी। यदि इस प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिलती है, तो यह नियम भविष्य में सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पास होने वाले MBBS छात्रों पर लागू किया जाएगा। आगे पढ़िए..

क्यों लाई जा रही है नई पॉलिसी?

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, हर वर्ष बड़ी संख्या में MBBS डॉक्टर पास होकर सरकारी सेवा में आते हैं, लेकिन कई डॉक्टर कुछ ही समय बाद PG के लिए चले जाते हैं। इस दौरान वे कागजों में विभाग से जुड़े रहते हैं, जबकि अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी बनी रहती है। इसका सबसे अधिक असर दूरदराज और पर्वतीय क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है। नई नीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पढ़े डॉक्टर पहले प्रदेश की जनता को अपनी सेवाएं दें और उसके बाद उच्च शिक्षा के लिए जाएं।

नीति तैयार कर शासन को भेज दी

स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सुनीता टम्टा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में नीति तैयार कर शासन को भेज दी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कई MBBS डॉक्टर स्वास्थ्य विभाग में जॉइनिंग के कुछ समय बाद ही PG के लिए आवेदन कर देते हैं, जिससे डॉक्टरों की कमी और बढ़ जाती है। नई नीति के तहत उन्हें कम से कम तीन वर्ष तक सरकारी सेवा देना अनिवार्य होगा, जिसके बाद ही PG के लिए अनुमति दी जाएगी।

कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार

फिलहाल यह प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन है। यदि आगामी कैबिनेट बैठक में इसे मंजूरी मिल जाती है, तो उत्तराखंड में सरकारी मेडिकल कॉलेजों से MBBS करने वाले छात्रों के लिए यह एक बड़ा नीतिगत बदलाव होगा।