बाबा बदरीनाथ के लिए जो भविष्यवाणी की गई थी, वो अब सच साबित हो रही है। आइए इस बारे में जानिए
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कपिल
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Image: Bhavishya badri story
: भगवान बद्रीनाथ के बारे में तो आप जानते ही होंगे। नर और नारायण पर्वत के बीच बसा हुआ ये मंदिर हिंदू आस्था का प्रतीक है। एक मान्यता है कि कलियुग के आखिर में नर-नारायण पर्वत एक दूसरे से मिल जाएंगे। इस वजह से बद्रीनाथ का रास्ता बंद हो जाएगा और लोग यहां बाबा बद्री विशाल के दर्शन नहीं कर पाएंगे। अब सवाल ये उठता है कि अगर आप बद्रीनाथ के दर्शन यहां नहीं कर पाएंगे तो कहां होंगे? इस बारे में हम आपको बताएंगे लेकिन पहले ये भी आपको बता दें कि बद्रीनाथ के बारे में एक मान्यता काफी प्रचलित है, वो ये कि जो एक बार यहां दर्शन करता है, उसका पुनर्जन्म नहीं होता। ऐसा इसलिए कि इस धाम के दर्शन मात्र से ही मनुष्य को मुक्ति मिल जाती है। कहा जाता है कि ये ही भगवान विष्णु के बैकुंठ का दूसरा रूप है। ऐसा इसलिए क्योंकि सतयुग में यहां भगवान विष्णु ने बालरूप में जन्म लिया था।
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बैकुंठ के बाद बद्रीनाथ को ही भगवान विष्ण का दूसरा निवास बताया गया है। कहा जाता है कि बद्रीनाथ से पहले भगवान आदिबद्री में निवास करते थे। इसके बाद वो बद्रीनाथ आए और बद्रीनाथ के बाद वो भविष्य बद्री चले जाएंगे। नर और नारायण पर्वत के मिलने के बाद भगवान भविष्य बद्री को अपना निवास स्थान बना लेंगे। उत्तराखंड में जिस तरह से पंच केदार हैं, उसी तरह से पंच बद्री भी हैं। इन पंच बद्री में आदि बद्री, बद्रीनाथ, भविष्य बद्री, योगध्यान बद्री और वृद्ध बद्री हैं। इन पांचों बद्री धामों के अलग अलग महत्व हैं। इसके पीछे एक कहानी भी हम आपको बता रहे हैं, जो लगभग सच भी हो रही है। जोशीमठ में शीतकाल के दौरान भगवान बद्रीनाथ रहते हैं। हां बद्री रहते हैं, वहीं भगवान नृसिंह की एक मूर्ति रखी है। इस मूर्ति के साथ कुछ अकल्पनीय घटनाएँ हो रही हैं। कहा जा रहा है कि वक्त के साथ साथ इस मूर्ति की एक भुजा पतली होती जा रही है।
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इसके साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि जिस दिन ये भुजा बेहद पतली होकर टूट जाएगी, उस दिन नर और नारायण पर्वत एक हो जाएंगे। अब आपको भविष्य बद्री के बारे में भी बता देते हैं। इसके बारे में कहा जाता है कि यहां मंदिर के पास ही एक शिला मौजूद है। इस शिला को अगर आप ध्यान से देखेंगे तो आपको इसमें भगवान की आधी आकृति ही नजर आएगी। कहा जाता है कि जिस दिन ये आकृति साफ साफ दिखने लगेगी, या फिर यूं कहें तो पूर्ण रूप ले लेगी, उस दिन भगवान बद्रीनाथ यहां विराजमान होंगे। भविष्य बदरी के पुजारी कहते हैं कि धीरे-धीरे इस शिला पर भगवान की दिव्य आकृति उभरती जा रही है। इसके साथ ही कहा जा रहा है कि जो हमारे शास्त्रों और पुराणों में लिखा गया है, वो बात भी सत्य होती जा रही है। भविश्य बद्री जाने के लिए आपको जोशीमठ से तपोवन की तरफ जाना होगा। यहां से आप रिंगी होते हुए भविष्य बद्री जा सकते हैं।