Advertisement
Secret Himalayan Treks Near Kedarnath You’ve Never Heard Of
Trails once used by sages, locals, and shepherds. Ideal for travelers seeking silence over social media fame.
Example Ads Media
: शर्म क्या है ? जब इंसानियत सड़क पर लाश बनकर सड़ने लगे तो वो शर्म है। जब खुद को इंसानियत के हुक्मरान कहने वाले सफेदपोशों को सड़क पर पड़ी लाश और मानवीय संवेदनाएं ना दिखें, तो उसे शर्म कहते हैं। क्या ये शर्म की बात नहीं कि विजय की लाश बीते 6 दिनों से जापान के टोक्यो एयरपोर्ट पर रखी है और भारतीय दूतावास कोई मदद नहीं कर रहा? विजय की चार साल की बेटी सौम्या है, जो अपनी मां से बार बार एक सवाल पूछ रही है कि आखिर मेरे पापा कब आएंगे ? लेकिन अब उस परिवार को कुछ मदद की आस जगी है। मदद देने का भरोसा उत्तराखंड के रोशन रतूड़ी ने दिलाया है। दरअसल कानपुर के विजय की जापान में तबियत बिगड़ने पर मौत हो गई थी। विजय के दो भाई दिल्ली में भारतीय दूतावास के बाहर डेरा डाले हैं लेकिन कोई मदद नहीं मिल रही।
आदरणीय दोस्तों सादर प्रणाम और सलाम ।
अगर आप सब इजाज़त दे तो विजय कुमार जी के पार्थिव शरीर को लेने भी मै जापान जाता हूँ...
Posted by Roshan Raturi RR on Friday, October 19, 2018