देवभूमि उत्तराखंड उन वीरों की मातृभूमि भी है, जो हर पल हर वक्त देश की सेवा में तैनात हैं।
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कपिल
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Image: three brothers fom pauri garhwal are officers of armed forces
: तेरा गौरव अमर रहे मां हम दिन-चार रहें ना रहें। मातृभूमि के की रक्षा के प्रति अगर किसी के दिल में सबसे ज्यादा जोश और उबाल है, तो शायद पहले नंबर वो उत्तराखंड के युवाओं का नाम होगा। आज देश ये सोचने पर मजबूर है कि जाने किस मिट्टी के बने हैं पहाड़ के युवा? आंखों में देश के लिए प्यार, दिमाग में दुश्मन को मात देने का जुनून और दिल में अपने घर परिवार की यादें बसाए ये युवा देश की सरहदों पर तैनात रहते हैं। बिना शक के कहा जा सकता है कि आज देश की सेना में सबसे ज्यादा युवा उत्तराखंड से हैं। इससे बड़ी बात क्या होगी कि एक ही परिवार के तीन बेटे आर्मी, नेवी और एयरफोर्स में अफसर हैं। हाल ही में जून के महीने में देहरादून की इंडियन मिलिट्री एकेडमी में पासिंग आउट परेड हुई थी। इस परेड में भी सबसे खास उत्तराखंड ही था।
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पहाड़ के एक परिवार के तीन बेटों ने साबित कर दिखाया कि देशसेवा और देशप्रेम का जुनून क्या होता है। यकीन मानिए पासिंग आउट परेड में पहाड़ के एक ही परिवार के तीन युवाओं पर देशभर की नज़रें टिकी रहीं। पौड़ी गढ़वाल जिले के बीएसएफ कमांडेंट महाबीर प्रसाद का सीना गर्व से चौड़ा हो गया था। दरअसल महाबीर प्रसाद का सबसे बड़ा बेटा अमित इंडियन नेवी में अफसर है। इसके अलावा उनका मंझला बेटा शुभम जून के महीने में आईएमए से पास आउट हो चुका है और देश की सेना में लेफ्टिनेंट पद पर है। गर्व की बात है कि महाबीर प्रसाद का तीसरा बेटा पुणे में एयरफोर्स की ट्रेनिंग ले रहा है। जिस दौरान पासिंग आउट परेड हो रही थी, तो महाबीर प्रसाद के बेटे शुभम ने कुछ ऐसी बातें बताईं कि आपका सीना भी गर्व से फूल जाएगा।
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पासिंग आउट परेड के बाद जब शुभम के कंधे पर दो स्टार सजे थे तो उन्होंने बताया कि उन्होंने बचपन में बॉर्डर फिल्म देखी थी। इसके बाद ही उन्होंने फैसला कर दिया था कि वो एक दिन देश की सेना की वर्दी पहनेंगे। शुभम के बड़े भाई अमित विशाखापट्टनम में तैनात है। उनका छोटा भाई पुणे में वायुसेना अफसर की ट्रेनिंग ले रहा है। गर्व की बात ये है कि उनके पिता खुद बीएसएफ में कमांडेंट हैं और ग्वालियर में तैनात हैं। शुभम की पढ़ाई लिखाई केंद्रीय विद्यालय हल्द्वानी में हुई है। बेटे का कहना है कि परिवार में पहले से ही अनुशासन का माहौल रहा था। पिता कमांटेंड थे और बड़ा भाई नेवी में अफसर, तो देश की सेवा करने का जुनून उबाल मारने लगा था। इसके लिए शुभम ने जी तोड़ तैयारी की और आईएमए से पासआउट होकर देश की सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर तैनात हो गए हैं। सलाम इस परिवार को।