दिवाली के मौके पर जनरल बिपिन रावत उत्तराखंड पहुंचे। वो बॉर्डर पर वीर जवानों के साथ दीपावली का त्योहार मनाएंगे।
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कपिल
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Image: Bipin rawat in uttarakhand border
: दिवाली का त्योहार इन जवानों के लिए भी बेहद खास है। कई बार ऐसा भी होता है कि वो त्योहारों पर घर नहीं जा पाते। घर की याद तो सताती होगी लेकिन उससे पहले देश की रक्षा बेहद जरूरी है। ऐसे में दिवाली पर एक दीया इन जवानों के नाम भी जलाएं। ये ही संदेश देने के लिए आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत उत्तराखंड स्थित भारत-चीन सीमा पर आए और जवानों का उत्साहवर्धन किया। दिवाली का मौका है, ऐसे में हर कोई अपने गांव अपने घर की तरफ लौटता है। सेना के जवान, जो कड़ाके की ठंड और रूह कंपा देने वाली बर्फबारी के बीच बॉर्डर पर तैनात हैं, उनके लिए भी दिवाली का त्योहार खास होता है। ऐसे में इन जवानों का हौसला बढ़ाने के लिए आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत इस दिवाली के मौके पर उत्तराखंड में हैं।
बिपिन रावत सुबह करीब साढ़े आठ बजे उत्तराखंड-चीन सीमा स्थित नेलांग बार्डर पहुंचे। इस दौरान जनरल रावत ने ITBP के जवानों का उत्साह बढ़ाया और दिवाली की शुभकामनाएं दी हैं। आपको बता दें कि उत्तराखंड की 345 किलोमीटर लंबी सीमा चीन से सटी हुई है। इस 345 किलोमीटर में से 122 किलोमीटर की सीमा उत्तरकाशी जिले में पड़ती है। इस बॉर्डर की सुरक्षा का जिम्मा आइटीबीपी की 12वीं वाहिनी मातली और 35वीं वाहिनी माहिडांडा के हिमवीरों के कंधों पर है। इसके अलावा इस बॉर्डर पर महार रेजीमेंट और गढ़वाल स्काउट के जवानों को भी तैनात किया गया है। उत्तरकाशी जिले की नेलांग घाटी में भारतीय सेना और ITBP की नौ चौकियां हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि ये चौकियां 12 हजार फीट से 17 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित हैं।
आजकल नेलांग घाटी का तापमान शून्य से भी कम है। इसके बाद भी सेना और आईटीबीपी के जवान यहां मुस्तैदी से तैनात रहते हैं। जनरल बिपिन रावत जवानों के बीच करीब दो घंटे रहे। उन्होंने बॉर्डर की जानकारी ली और इसके बाद हर्षिल पहुंचे। हर्षिल में आर्मी के जवानों ने अपने जनरल का भव्य स्वागत किया। उत्तरकाशी जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में जनरल बिपिन रावत का ये पहला दौरा है। उधर खबर ये भी है कि पीएम मोदी भी चमोली स्थित भारत-चीन बॉर्डर पर जवानों के साथ दिवाली का त्योहार मनाएंगे। देश के दो जिम्मेदार पदों पर बैठे दो कद्दावर शख्स इस दिवाली ये संदेश देना चाहते हैं कि दिवाली पर उन जवानों को भी याद करें, जो मातृभूमि की रक्षा करते करते शहीद हो गए और उनके घर की दीवाली सूनी हो गई। दिवाली पर एक दीया उन शहीदों के नाम।