उत्तराखंड के इस गांव में आज़ादी के 70 साल बाद पहुंची बिजली, लोगों ने मनाया जश्न

सवाल ये है कि क्या आज़ादी के बाद के 70 सालों तक राजनीति के पैरोकारों की नज़र इस गांव पर नहीं पड़ी ?
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उत्तराखंड न्यूज: First time electricity in ghes village of uttarakhand
Image: First time electricity in ghes village of uttarakhand

चमोली: बिजली के बिना हम क्या कल्पना कर सकते हैं ? आप अगर शहर में या फिर कस्बे में रह रहे हैं, तो बिजली की कीमत को अच्छी तरह से समझ सकते हैं। आज घर के कई काम ऐसे हैं, जो बिजली के बिना असंभव हैं। ऐसे में किसी ऐसे गांव की कल्पना कीजिए, जो आज़ादी के 70 सालों से बिना बिजली के गुजर बसर कर रहा था। उस गांव के लोगों ने अब जाकर आजा़दी के 70 साल बाद बिजली को देखा। हम बात कर रहे हैं चमोली जिले के देवाल के घेस गांव की, जिसके लिए रविवार का दिन ऐतिहासिक रहा। आजादी के सात दशक बाद इस गांव में बिजली पहुंची तो लोगों के चेहरे खिल गए। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने घेस गांव में आयोजित कार्यक्रम में जब बिजली का स्विच ऑन किया तो हर किसी के चेहरे पर खुशी की एक अलग ही चमक देखने को मिली।

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घेस गांव के अलावा उसके आसपास के गांवों जैसे हिमनी, बलाण और रामपुर तोरती भी अभी बिजली से अछूते हैं। ऐसे में सरकार का अगला लक्ष्य इन गांवों में भी बिजली पहुंचाना है। मौके पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि सरकार का उद्देश्य उत्तराखंड के सबसे दूरस्थ गांव का विकास करना है। उन्होंने कहा कि घेस को एक मॉडल गांव के रूप में तैयार किया जाएगा। इसके लिए मुख्य विकास अधिकारी चमोली को निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही घेस क्षेत्र के लिए 74.8लाख रुपये की लागत की पेयजल योजना, राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय का भी लोकार्पण किया गया।
सीएम ने कहा कि घेस क्षेत्र में राष्ट्रीय जड़ी बूटी संस्थान खोला जाएगा, इसकी स्वीकृति केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद नाइक दे चुके हैं।

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कुल मिलाकर कहें तो आज़ादी के 70 सालों के बाद घेस गांव के भले दिन आए हैं। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस बारे में कुछ जरूरी जानकारियां अपने फेसबुक पेज पर भी डाली हैं। देखिए।

चीन सीमा से सटा देश का सीमांत गांव 'घेस' चहुंमुखी विकास की राह पर दौड़ पड़ा है।

* आजादी के 70 साल बाद इस गांव में बिजली...

Posted by Trivendra Singh Rawat on Sunday, November 25, 2018