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: देवभूमि उत्तराखंड में मां आदिशक्ति का वास है। सदियों से यहां मां भगवती के अलग-अलग रूपों की पूजा होती आई है। रुद्रप्रयाग जिले के कालीमठ में मां आदिशक्ति के दैवीय पुंज की ऊर्जा आज भी महसूस की जा सकती है। कालीमठ मंदिर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है। तंत्र और साधना करने वालों के लिए इस मंदिर का महत्व कामख्या और मां ज्वालामुखी के मंदिरों समान है। कालीमठ मां दुर्गा के काली स्वरूप को समर्पित है। यहां मौजूद मंदिर में श्रद्धालु किसी प्रतिमा की नहीं, बल्कि एक पवित्र कुंड की पूजा करते हैं। ये कुंड सालभर रजतपट श्रीयंत्र से ढंका रहता है। केवल शारदीय नवरात्रि की अष्टमी के दिन कुंड के पट खोले जाते हैं और देवी की पूजा की जाती है। पूजा केवल मध्यरात्रि में होती है, उस वक्त मंदिर में केवल मुख्य पुजारी मौजूद रहते हैं। कहा जाता है कि इस कुंड में साक्षात मां काली का वास है।