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ऋषियों का मार्ग: केदार हिमालय के इन ट्रेक्स पर शोर नहीं, सिर्फ मंत्र सुनाई देते हैं
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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: देवभूमि उत्तराखंड मानवों के साथ-साथ देवताओं के लिए भी वंदनीय बताई गई है। इसी देवभूमि में एक ऐसा तीर्थ है, जहां भगवान शिव को ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति मिली थी। कहा जाता है कि पितरों को मोक्ष प्रदान करने वाले इस तीर्थ में पिंडदान करने का फल गया से आठ गुना ज्यादा मिलता है। ये धाम है बदरीनाथ में स्थित ब्रह्मकपाल...जहां भगवान भोलनेनाथ को ब्रह्महत्या से मुक्ति मिली थी। कहा जाता है कि यहां पर पिंडदान करने से पितरों को नर्क से मुक्ति मिलती है। ब्रह्मकपाल को गया से आठ गुना ज्यादा फलदायी पितर कारक तीर्थ कहा गया है। बदरीनाथ के पास स्थित ब्रह्मकपाल में पिंडदान और तर्पण का विशेष महत्व है। यहां भगवान शिव और पांडवों को ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति मिली थी। वेदों और पुराणों में भी इस जगह का जिक्र किया गया है। आइए आपको वो पौराणिक कहानी भी बताते हैं।