चमोली जिले के पीपलकोटि के सागर शाह की कहानी भी गजब है। GATE परीक्षा पास की लेकिन फिर से पकौड़े बेचकर अच्छी खासा कमाई कर रहे हैं।
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आदिशा
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प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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Image: STORY OF SAGAR SHAH OF CHAMOLI UTTARAKHAND
: कहते हैं हाथों का हुनर निशाने पर जाकर ही लगता है। ऊपरवाले ने इंसान को शरीर दिया है, दिमाग दिया है, हुनर दिया है। अब उस शरीर, उस दिमाग और उस हुनर का इस्तेमाल तो इंसान को ही करना है ना? हाथ पर हाथ रखकर बैठने से क्या फायदा? सरकार के भरोसे कब तक रहे और कब तक सरकार को कोसते रहें? लाखों एक कोई एक होता है, जो अपनी तकदीर अपने हाथों से लिखता है और सफलता की एक नई इबारत गढ़ देता है। ऐसे हैं चमोली जिले के सागर शाह। सागर ने गेट परीक्षा पास की है लेकिन पकौड़े तल कर अपने परिवार के काम को आगे बढ़ा रहे हैं। दरअसल सागर शाह ने GATE परीक्षा में 8000वीं रैंक हासिल की । कमाल की बात ये है कि गेट परीक्षा की तैयारी के लिए सागर ने कहीं से कोचिंग नहीं ली, उन्होंने अपने दम पर तैयारी की और परीक्षा पास कर ली। लेकिन यहां पेंच ये फंस गया...आगे पढ़िए
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दरअसल सागर को उनका मनमाफिक इंस्टीट्यूट नहीं मिला। वैसे भी रोजगार के लिए उन्हें अपने जन्मस्थान को छोड़ना गवारा न था, लिहाजा वृद्ध पिता के पुश्तैनी पकौड़े की दुकान चलाकर ही उन्होंने अपनी आजीविका कमानी शुरू कर दी। सागर कहते हैं कि पढ़ाई के साथ पकौड़े की दुकान चलाना खुद में एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि मजदूर और रसोइया बहुत मुश्किल से मिलते हैं। कोई भी काम छोटा नहीं होता। किसी ने क्या खूब कहा है कि जिंदगी बॉक्सिंग मैच की तरह होती है। एक ऐसा मैच आप गिरने की वजह से नहीं हारते...आप हारते तब हैं जब आप गिरने के बाद उठने से मना कर देते हैं...ये लाइनें उत्तराखंड के इस होनहार छात्र पर एकदम सटीक बैठती हैं, वैसे सागर शाह इन दिनों नेशनल-रीजनल मीडिया में छाए हुए हैं। सागर इन दिनों बद्रीनाथ यात्रा मार्ग पीपलकोटी में पुश्तैनी पकौड़े की दुकान में पकौड़े तल कर अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं और वृद्ध माता -पिता की सेवा कर रहे हैं।